बिहार

बक्सर में बड़ी लापरवाही: 26 करोड़ के ROB पर गाड़ियां रोककर मनाई गई बर्थडे पार्टी।

Saba Naaz
12 July 2026 2:54 PM IST
बक्सर में बड़ी लापरवाही: 26 करोड़ के ROB पर गाड़ियां रोककर मनाई गई बर्थडे पार्टी।
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बक्सर: बिहार के बक्सर जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और सरकारी तंत्र पर करारा तंज कसता हुआ मामला सामने आया है। यहाँ लगभग 26.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने नवनिर्मित इटाढ़ी रोड ओवरब्रिज (ROB) पर गाड़ियों का आवागमन बंद होने के बाद, अब वहाँ जन्मदिन की पार्टी और नाच-गाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वही ओवरब्रिज है जो उद्घाटन के चंद घंटों के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गया था और जिसे बीते पांच जून को मरम्मत के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था। जनता जहाँ एक तरफ बंद पुल के कारण आने-जाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है, वहीं दूसरी तरफ बंद पड़े इस सरकारी पुल का इस्तेमाल डांस फ्लोर और पार्टी वेन्यू के रूप में किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आम लोगों और वाहनों के लिए बंद किए जा चुके इस ओवरब्रिज के ऊपर बकायदा एक भव्य टेंट लगाया गया है, चमचमाती लाइटिंग की गई है और एक बड़ा सा मंच (स्टेज) सजाकर जन्मोत्सव समारोह का आयोजन किया गया है। इतना ही नहीं, इस जन्मदिन पार्टी में 'सांस्कृतिक कार्यक्रम' के नाम पर जमकर नाच-गाना भी हुआ। इंटरनेट मीडिया पर नीतीश कुमार नाम के एक फेसबुक यूजर ने इस वीडियो को साझा करते हुए तंज भरे लहजे में लिखा, 'बक्सर इटाढ़ी रोड ओवर ब्रिज का सही इस्तेमाल हो रहा है' और इसके कैप्शन में पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए आगे लिखा— 'मिशन सक्सेसफुल'। अब यह वीडियो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग व्यवस्था पर जमकर चुटकियाँ ले रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम, भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की सबसे भारी कीमत बक्सर की स्थानीय जनता को चुकानी पड़ रही है। गौरतलब है कि जैसे ही इस रोड ओवरब्रिज पर आवागमन शुरू किया गया था, रेलवे ने इसके ठीक नीचे स्थित पुराने समपार फाटक (गुमटी संख्या-70) को बीते 30 मई को हमेशा के लिए स्थायी रूप से बंद कर दिया था। अब स्थिति यह हो गई है कि पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद रेलवे उस बंद पुराने फाटक को दोबारा खोलने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है, और दूसरी तरफ इस नवनिर्मित ओवरब्रिज के भी अगले कई महीनों तक चालू होने की कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है।

इस दोहरे संकट के कारण सिकरौल, इटाढ़ी, दिनारा, नावानगर और धनसोईं जैसे दर्जनों ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आने-जाने वाले हजारों राहगीरों और वाहन चालकों को प्रतिदिन कई किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हुए चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है। करोड़ों की लागत से तैयार यह महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी जी का जंजाल और इंटरनेट मीडिया पर एक बड़ा मज़ाक बनकर रह गई है। लोग अब इस पुल के अलग-अलग हिस्सों में चल रही मरम्मत की तस्वीरें साझा कर प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यह पुल कभी सुरक्षित यातायात के लिए खुल भी पाएगा या नहीं?

शुरुआती दौर में प्रशासनिक अधिकारियों और पुल निर्माण निगम के इंजीनियरों द्वारा यह दावा किया गया था कि पिलर नंबर 5 के पास एक्सपैंशन ज्वाइंट में बहुत मामूली नुकसान हुआ है, जिसे महज 15 दिनों के भीतर ठीक करके यातायात दोबारा बहाल कर दिया जाएगा। लेकिन जब गहन जांच की गई, तो परतें खुलीं और पता चला कि पुल के निर्माण में तय मानकों का ध्यान ही नहीं रखा गया था और समस्या अनुमान से कहीं अधिक गंभीर है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के इंजीनियरों के अनुसार, अब इस पुल को ठीक होने में कम से कम दो महीने से अधिक का समय लगेगा। वर्तमान में पुल के तीन अलग-अलग पिलरों पर एक्सपेंशन ज्वाइंट्स को पूरी तरह से तोड़कर नए सिरे से आरसीसी ढलाई करने की योजना पर काम चल रहा है, जिसने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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