
Bihar बिहार: कभी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों की प्रमुख धुरी रही सकरी चीनी मिल लंबे समय से बंद पड़ी है। मिल के बंद होने के बाद इसके विशाल परिसर में सन्नाटा छा गया था, जबकि इसकी खामोश चिमनियां और वीरान ढांचा लोगों को पुराने समृद्ध दिनों की याद दिलाता रहा है। लेकिन अब इस बंद मिल में फिर से गतिविधियां शुरू होने के संकेत मिलने लगे हैं।
मिल के पुनरुद्धार और दोबारा संचालन की तैयारियां तेज हो गई हैं, जिससे क्षेत्र के किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं के बीच नई उम्मीदें जागी हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि मिल के शुरू होने से गन्ना उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
इसी क्रम में शनिवार को विधायक सह जदयू जिलाध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ ईश्वर मंडल सकरी चीनी मिल परिसर पहुंचे। उन्होंने वहां चल रही शुरुआती तैयारियों का विस्तार से निरीक्षण किया और मिल की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान विधायक ने मिल परिसर में मौजूद आधारभूत संरचनाओं, मशीनरी और अन्य संसाधनों का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से मिल के पुनः संचालन को लेकर चल रही तैयारियों की जानकारी भी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मिल बंद होने के बाद क्षेत्र में रोजगार के अवसर काफी कम हो गए थे, जिससे बड़ी संख्या में मजदूरों और युवाओं को पलायन करना पड़ा था। अब मिल के पुनः शुरू होने की संभावना से रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसानों का कहना है कि मिल चालू होने से गन्ने की बिक्री आसान होगी और उन्हें अपनी उपज के लिए दूर-दराज की फैक्ट्रियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे परिवहन लागत भी कम होगी और समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी।
फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग मिल को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं। हालांकि अभी तक संचालन की आधिकारिक तिथि की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन तैयारियों की गति को देखते हुए लोगों में सकारात्मक उम्मीदें बनी हुई हैं।
सकरी चीनी मिल के पुनरुद्धार की यह पहल क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और रोजगार सृजन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





