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Bihar : दिव्यांगता के बावजूद रक्तदान से बनी मिसाल, समाज सेवा में सक्रिय भूमिका

Kavita2
14 Jun 2026 4:44 PM IST
Bihar : दिव्यांगता के बावजूद रक्तदान से बनी मिसाल, समाज सेवा में सक्रिय भूमिका
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Bihar बिहार: दरभंगा शहर के खराजपुर मोहल्ला निवासी वैद्यनाथ कुमार सहनी अपनी दिव्यांगता के बावजूद समाज सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। पोलियो के कारण शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने रक्तदान और जरूरतमंदों की सहायता को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया है।

वैद्यनाथ सहनी ने करीब 14 वर्ष पहले स्वयं रक्तदान करके इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने न केवल स्वयं नियमित रूप से रक्तदान करना जारी रखा, बल्कि अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना शुरू किया। उनके प्रयासों से आज कई लोग रक्तदान जैसे सामाजिक कार्य से जुड़े हैं।

वर्तमान में वे ‘युवा शक्ति फाउंडेशन’ के माध्यम से सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। वैद्यनाथ स्वयं वर्ष में दो बार से अधिक रक्तदान करते हैं और जरूरत पड़ने पर मरीजों की मदद के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान एक सक्रिय रक्तदाता और जरूरतमंदों की मदद करने वाले व्यक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है।

उनके सामाजिक योगदान को कई संस्थाओं ने सराहा है। उन्हें एक दर्जन से अधिक सामाजिक संगठनों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इनमें समर्पण संस्था पटना द्वारा दिया गया ‘डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम विजनरी ऑफ इंडिया अवार्ड-2025’ और ‘रक्तवीर सम्मान-2024’ प्रमुख हैं। ये सम्मान उनके लगातार सामाजिक योगदान की पुष्टि करते हैं।

वैद्यनाथ सहनी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वे मात्र चार वर्ष की उम्र में पोलियो से प्रभावित हो गए थे, जिससे उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया। इसके बाद जब वे इस कठिनाई से जूझ ही रहे थे, तब मात्र दस वर्ष की उम्र में उनके पिता का साया भी उनके सिर से उठ गया। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जीवन में आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

आज वे एक जनरल स्टोर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं और साथ ही सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं। उनका मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी समाज के लिए कुछ किया जा सकता है, बस इच्छाशक्ति मजबूत होनी चाहिए।

वैद्यनाथ सहनी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि मन में सेवा भाव हो तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनके कार्य आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

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