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Bihar : दूध महंगा, सुधा डेयरी ने बढ़ाई कीमतें, 22 मई से लागू होंगी नई दरें

Kavita2
21 May 2026 5:51 PM IST
Bihar : दूध महंगा, सुधा डेयरी ने बढ़ाई कीमतें, 22 मई से लागू होंगी नई दरें
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Bihar बिहार: बिहार में महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्य की प्रमुख डेयरी कंपनी सुधा डेयरी ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें 22 मई 2026, यानी शुक्रवार से पूरे राज्य में लागू होंगी।

कंपनी के इस फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को सुधा दूध खरीदने के लिए प्रति लीटर 2 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन लाखों परिवारों पर पड़ेगा जो रोजाना दूध का उपयोग करते हैं।

दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। खासकर शहरों और कस्बों में रहने वाले मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बदलाव महंगाई को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

सुधा डेयरी के अनुसार, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और पशु आहार सहित अन्य खर्चों में वृद्धि के कारण दूध की कीमतें बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। कंपनी का कहना है कि किसानों से दूध की खरीद लागत में भी लगातार इजाफा हो रहा है, जिसका असर अंतिम उत्पाद की कीमतों पर पड़ रहा है।

नई दरों के लागू होने के बाद विभिन्न श्रेणियों के दूध की कीमतों में समान रूप से वृद्धि देखी जाएगी। इससे रोजमर्रा की जरूरतों पर निर्भर उपभोक्ताओं को अपनी मासिक खर्च योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

स्थानीय बाजारों में इस घोषणा के बाद उपभोक्ताओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण पहले से ही घरेलू बजट प्रभावित है, और अब दूध की कीमत बढ़ने से स्थिति और कठिन हो जाएगी।

वहीं कुछ उपभोक्ताओं का मानना है कि उत्पादन लागत बढ़ने की स्थिति में कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। हालांकि, आम लोगों ने सरकार से महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दूध जैसी आवश्यक वस्तु की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर हर घर पर पड़ता है, क्योंकि यह दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस बढ़ोतरी का प्रभाव व्यापक स्तर पर महसूस किया जाएगा।

कुल मिलाकर, सुधा डेयरी द्वारा दूध की कीमतों में की गई यह बढ़ोतरी बिहार के उपभोक्ताओं के लिए एक और आर्थिक बोझ साबित हो सकती है, जिससे घरेलू खर्चों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की संभावना है।

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