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Bihar : छपरा में ड्रेनेज योजना धीमी, इस मानसून भी जलजमाव का खतरा

Kavita2
11 July 2026 3:49 PM IST
Bihar : छपरा में ड्रेनेज योजना धीमी, इस मानसून भी जलजमाव का खतरा
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छपरा : हर साल मानसून के दौरान जलजमाव की समस्या से जूझने वाले छपरा शहर को इस बार भी राहत के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। शहर में बारिश के पानी की निकासी के लिए शुरू की गई 134 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना धीमी गति से आगे बढ़ रही है। दो साल में पूरी होने वाली इस परियोजना का काम अब तक 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो पाया है।

योजना की धीमी प्रगति के कारण शहर के कई इलाकों में इस मानसून भी जलभराव की समस्या बने रहने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के बाद सड़कों और मोहल्लों में पानी भर जाता है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सितंबर 2023 में मिली थी योजना को मंजूरी

छपरा शहर में जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बिहार सरकार ने सितंबर 2023 में स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना को मंजूरी दी थी। इस परियोजना की कुल लागत 134 करोड़ 97 लाख 89 हजार रुपये निर्धारित की गई थी।

योजना के तहत छपरा नगर निगम क्षेत्र में करीब 30 किलोमीटर लंबे मुख्य नाले और भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क का निर्माण किया जाना है। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को तेजी से शहर से बाहर निकालना और लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना है।

दो साल में पूरा होना था काम

परियोजना को तय समय सीमा के अनुसार दो साल में पूरा किया जाना था। इसके पूरा होने के बाद शहर के प्रमुख इलाकों में बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद थी।

लेकिन निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के कारण निर्धारित समय पर योजना पूरी होती नजर नहीं आ रही है। अब तक आधा काम भी पूरा नहीं होने से इसकी समयसीमा पर सवाल उठने लगे हैं।

कई इलाकों में हर साल होती है परेशानी

छपरा शहर के कई ऐसे इलाके हैं, जहां मानसून के दौरान जलजमाव आम समस्या बन जाती है। थोड़ी तेज बारिश के बाद सड़कों, गलियों और निचले इलाकों में पानी भर जाता है।

जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। इसके अलावा गंदगी, मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से जल निकासी की समस्या बनी हुई है और हर बार बारिश से पहले राहत के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान का इंतजार अभी भी जारी है।

निर्माण कार्य में तेजी की जरूरत

शहरवासियों की मांग है कि स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना के काम में तेजी लाई जाए, ताकि आने वाले समय में जलजमाव की समस्या से राहत मिल सके।

लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत वाली इस परियोजना का लाभ तभी मिलेगा, जब इसे समय पर पूरा किया जाए। मानसून के दौरान होने वाली परेशानी को देखते हुए निर्माण एजेंसी को काम की गति बढ़ाने की जरूरत है।

योजना से बदल सकती है शहर की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना पूरी तरह लागू हो जाती है तो छपरा शहर में जल निकासी व्यवस्था में बड़ा सुधार हो सकता है। भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क और नए नालों के निर्माण से बारिश के पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकाला जा सकेगा।

इससे न केवल जलजमाव की समस्या कम होगी, बल्कि शहर की स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं में भी सुधार आएगा।

मानसून से पहले लोगों की बढ़ी चिंता

मानसून शुरू होने के साथ ही शहर के लोगों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें डर है कि यदि भारी बारिश हुई तो अधूरी ड्रेनेज व्यवस्था के कारण पहले जैसी स्थिति फिर बन सकती है।

लोगों का कहना है कि योजना को जल्द पूरा करना जरूरी है, क्योंकि हर साल बारिश के मौसम में होने वाली परेशानी से शहरवासियों को लंबे समय से जूझना पड़ रहा है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और निर्माण एजेंसी परियोजना के काम में कितनी तेजी लाती है और छपरा को जलजमाव से स्थायी राहत कब तक मिल पाती है।

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