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Bihar बिहार: लोक आस्था का महापर्व चैती छठ शुक्रवार को बिहार में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो गया। व्रतियों और श्रद्धालुओं ने पटना के 41 गंगा घाटों और 7 तालाबों पर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। 4 दिवसीय छठ के समापन के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त हो गया। सुबह 4 बजे से ही छठ व्रतियों के गंगा घाटों पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। व्रतियों ने गंगा घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत तोड़ा। बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में भी यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मइया को समर्पित है। यह साल में दो बार मनाए जाने वाले छठ पर्वों में से एक है, दूसरा कार्तिक माह में मनाया जाता है, जिसे कार्तिकी छठ कहा जाता है। दिल्ली के नोएडा में रहने वाली बिहार की महिलाओं को एक बार फिर यमुना के गंदे पानी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। व्रती महिलाएं कीचड़ से होकर गिरते पानी तक पहुंचीं और सूर्य को अर्घ्य दिया। पानी बहुत बदबूदार था। इससे श्रद्धालुओं को परेशानी भी हुई।
चार दिन चलने वाला पर्व
नहाय-खाय: पहले दिन व्रती स्नान करते हैं और शुद्ध भोजन (बिना लहसुन-प्याज) ग्रहण करते हैं।
खरना: दूसरे दिन शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाया जाता है, जिसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन डूबते सूर्य को जल और प्रसाद अर्पित किया जाता है।
उषा अर्घ्य: चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होता है।
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