
पटना : बिहार सरकार ने बच्चों के कल्याण और विकास को लेकर बजट में लगातार बढ़ोतरी की है। राज्य में वर्ष 2013-14 से शुरू किए गए बाल बजट के तहत पिछले 13 वर्षों में बाल-केंद्रित योजनाओं पर होने वाले खर्च में बड़ा इजाफा हुआ है। वित्त विभाग की सचिव (व्यय) रचना पाटिल ने शुक्रवार को बताया कि इस अवधि में राज्य के कुल बजट में बाल-केंद्रित व्यय की हिस्सेदारी में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए किए जाने वाले खर्च को प्राथमिकता देने से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं को मजबूती मिली है। वह यूनिसेफ और चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू) के बाल अधिकार केंद्र के सहयोग से आयोजित तकनीकी परामर्श कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।
2013-14 में 7825 करोड़ था बाल बजट
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि बिहार में बाल बजट की शुरुआत वित्तीय वर्ष 2013-14 में हुई थी। उस समय राज्य के बाल बजट का आकार 7825 करोड़ रुपये था।
इसके बाद लगातार वर्षों में बच्चों से जुड़ी योजनाओं में निवेश बढ़ता गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार का बाल बजट बढ़कर 54,878.21 करोड़ रुपये हो गया। यानी करीब 13 वर्षों में बाल बजट में सात गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
प्रति बच्चा खर्च में भी बड़ा इजाफा
वित्त विभाग की सचिव रचना पाटिल ने बताया कि केवल कुल बजट में ही नहीं, बल्कि प्रति बच्चे पर होने वाले सरकारी खर्च में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 की तुलना में 2024-25 में प्रति बच्चा व्यय सात गुना से अधिक बढ़ गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार बच्चों के अधिकारों और उनके समग्र विकास को लेकर अधिक संसाधन उपलब्ध करा रही है।
बाल अधिकारों को मजबूत करने पर जोर
कार्यशाला में बिहार बाल कल्याण बजट 2026-27 की संरचना, योजनाओं के वर्गीकरण, बजट आवंटन और खर्च की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने को लेकर चर्चा की गई।
इस दौरान विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि बाल बजट को अधिक पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाया जाए, ताकि बच्चों के लिए जारी योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर फोकस
बाल बजट के तहत मुख्य रूप से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और विकास से जुड़ी योजनाओं को शामिल किया जाता है। राज्य सरकार विभिन्न विभागों के माध्यम से बच्चों के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है।
इन योजनाओं में स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देना, कुपोषण कम करना, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना शामिल है।
यूनिसेफ और सीएनएलयू की भूमिका
तकनीकी परामर्श कार्यशाला में यूनिसेफ और चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के बाल अधिकार केंद्र के विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य आगामी बाल कल्याण बजट को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव जुटाना था। इसमें सरकारी अधिकारियों, विशेषज्ञों और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
भविष्य के बजट को बेहतर बनाने की तैयारी
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बाल बजट केवल धन आवंटन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि योजनाओं के प्रभाव का आकलन भी जरूरी है।
विशेषज्ञों ने कहा कि बजट तैयार करते समय बच्चों की जरूरतों, क्षेत्रीय असमानताओं और कमजोर वर्गों के बच्चों की समस्याओं को ध्यान में रखना चाहिए।
बिहार सरकार अब 2026-27 के बाल कल्याण बजट को और बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए योजनाओं की समीक्षा, खर्च की निगरानी और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
13 वर्षों में बाल बजट की राशि में हुई बढ़ोतरी को राज्य में बच्चों के लिए बढ़ती प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि बजट के माध्यम से बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।





