
Bihar बिहार: बिहार के एक जिले में नीरा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत कुल 5300 ताड़ (पाम) पेड़ों की पहचान की गई है, जिनसे नीरा संग्रह और उत्पादन को बढ़ाया जाएगा।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और जीविका के संयुक्त प्रयास से इस सीजन में लगभग 17 लाख लीटर नीरा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योजना के तहत जिले में नीरा बिक्री के लिए 157 विक्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां से उपभोक्ता सीधे नीरा खरीद सकेंगे। इससे न केवल उत्पादकों को उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि पारदर्शी वितरण व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
अधिकारियों के अनुसार, ताड़ के पेड़ों की पहचान का कार्य पूरा कर लिया गया है और अब चरणबद्ध तरीके से नीरा संग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि नीरा के संग्रह और भंडारण में किसी प्रकार की समस्या न हो।
सरकारी योजना का उद्देश्य पारंपरिक पेय नीरा को एक संगठित बाजार से जोड़ना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित हो सकें। नीरा को एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में बढ़ावा देने की भी कोशिश की जा रही है।
जीविका के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीण महिलाएं और स्थानीय समुदाय इस उत्पादन और बिक्री व्यवस्था में सक्रिय रूप से भाग लेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
विभाग का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में नीरा उत्पादन को और अधिक क्षेत्रों में विस्तार दिया जा सकता है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य में वैकल्पिक आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।
फिलहाल, संबंधित विभागों ने तैयारियां तेज कर दी हैं और जल्द ही उत्पादन और बिक्री प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करने की योजना है।





