
भोजपुर: चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे आरोपों को लेकर पुलिस ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। फेसबुक अकाउंट से वीडियो गायब होने के मामले में भोजपुर पुलिस ने कहा है कि वीडियो या पोस्ट हटाने के लिए उसकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और असत्य बताया है।
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया माध्यमों पर यह दावा किया जा रहा था कि मृतक के फेसबुक अकाउंट से महत्वपूर्ण वीडियो और पोस्ट हटा दिए गए हैं। इन आरोपों के बाद भोजपुर पुलिस ने गुरुवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे मामले पर सफाई दी।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पुलिस ने फेसबुक या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को वीडियो या पोस्ट हटाने के संबंध में कोई अनुरोध नहीं भेजा है। पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना था।
भोजपुर पुलिस ने बताया कि जांच प्रक्रिया के दौरान डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए संबंधित फेसबुक अकाउंट को प्रिजर्व करने का अनुरोध किया गया था, ताकि भविष्य में जांच के दौरान आवश्यक जानकारी और डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रह सकें।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि अकाउंट को सुरक्षित रखने और किसी सामग्री को हटाने में बड़ा अंतर है। पुलिस के अनुसार, उसने किसी भी वीडियो, फोटो या पोस्ट को डिलीट कराने की प्रक्रिया नहीं अपनाई है। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों को पुलिस ने जांच को प्रभावित करने वाला बताया।
पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और खबरों में यह आरोप लगाया जा रहा है कि भरत तिवारी के फेसबुक अकाउंट से वीडियो गायब होने के पीछे पुलिस की भूमिका है। पुलिस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे आरोपों का कोई आधार नहीं है।
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला पहले से ही जांच के दायरे में है। इस मामले में न्यायिक जांच आयोग भी अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। आयोग के सामने पुलिस-प्रशासन पक्ष की गवाही शुरू हो चुकी है। वहीं, पीड़ित पक्ष की ओर से पहले ही कई लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
जांच एजेंसियां इस मामले में घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। इसमें पुलिस कार्रवाई, मौके की परिस्थितियां और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच शामिल है। डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जा रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचना चाहिए और जांच पूरी होने तक तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। पुलिस ने यह भी कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल फेसबुक वीडियो विवाद को लेकर भोजपुर पुलिस ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। पुलिस के अनुसार, उसने किसी भी डिजिटल सामग्री को हटाने का प्रयास नहीं किया, बल्कि जांच के लिए जरूरी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की कार्रवाई की है। अब आगे न्यायिक जांच और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।





