बिहार

भरत तिवारी केस अपडेट: सात दिनों में सामने आए अहम खुलासे

Saba Naaz
23 Jun 2026 6:12 PM IST
भरत तिवारी केस अपडेट: सात दिनों में सामने आए अहम खुलासे
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Bihar: भोजपुर (बिहार) में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस अब नए मोड़ पर पहुंच गया है. सातवें दिन इस मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत पर SDPO, तत्कालीन SHO समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज कर ली गई है. इस पूरी घटना ने पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

17 जून: एनकाउंटर और दो अलग-अलग कहानियां

17 जून की सुबह पुलिस ने बिलौटी गांव में छापेमारी कर भरत तिवारी को पकड़ने की कोशिश की. पुलिस का दावा था कि भरत ने टीम पर फायरिंग की और मुठभेड़ हुई. इसी दौरान एक फेसबुक लाइव वीडियो सामने आया, जिसमें भरत खुद को निर्दोष बताते हुए हथियार छोड़ने की बात करता दिखा. इसी वीडियो के बाद “एनकाउंटर बनाम सरेंडर” का विवाद शुरू हो गया.

पुलिस की FIR: फायरिंग और मुठभेड़ का दावा

पहली FIR में पुलिस ने भरत तिवारी, उसके पिता और भाई को आरोपी बनाया. आरोप था कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पुलिस पर गोली चलाई. दोपहर में दर्ज दूसरी FIR में कहा गया कि भरत ने भागते समय फिर से फायरिंग की और बाद में आत्मरक्षा में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई.

परिजनों का आरोप: सरेंडर के बाद हत्या

भरत की मां आशा देवी ने आरोप लगाया कि उनके बेटे ने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था. इसके बाद SDPO के आदेश पर उसे गोली मारी गई. परिवार ने इसे “फर्जी एनकाउंटर” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की.

18 जून: सड़क जाम और तीसरी FIR

मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर प्रदर्शन किया. इस दौरान पथराव और हंगामे के बाद पुलिस ने 13 नामजद और 50–60 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की.

20 जून: न्यायिक जांच का आदेश

मुख्यमंत्री स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया गया. सरकार ने कहा कि सच्चाई सामने लाना प्राथमिकता है.

22 जून: पुलिस चूक की स्वीकारोक्ति

लॉ एंड ऑर्डर एडीजी ने माना कि पुलिस कार्रवाई में गंभीर चूक हुई. मामले में SHO समेत 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और जांच की जिम्मेदारी DIG को सौंपी गई.

23 जून: 7वें दिन FIR में बड़ा मोड़

सातवें दिन आशा देवी की शिकायत पर बड़ा कदम उठाते हुए SDPO, तत्कालीन SHO और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज की गई. इससे पहले भी कई पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं, जिससे मामला पूरी तरह से जांच और विवाद के घेरे में आ गया है.

निष्कर्ष

भरत तिवारी एनकाउंटर केस अब सिर्फ एक मुठभेड़ का मामला नहीं रहा, बल्कि यह जांच, जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया पर सवालों का केंद्र बन गया है. आने वाले दिनों में न्यायिक जांच इसकी दिशा तय करेगी.

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