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BJP विधायक की हत्या की साजिश का आरोप, भागलपुर जेल अधीक्षक समेत चार पर FIR

Kavita2
8 Aug 2026 9:35 AM IST
BJP विधायक की हत्या की साजिश का आरोप, भागलपुर जेल अधीक्षक समेत चार पर FIR
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आरा। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक राकेश रंजन उर्फ राकेश विश्वेश्वर ओझा की हत्या की कथित साजिश का मामला सामने आने के बाद पुलिस और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। विधायक ने आरोप लगाया है कि भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा में उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है। इस संबंध में उन्होंने भोजपुर जिले के करनामेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। मामले में भागलपुर जेल अधीक्षक राजीव कुमार झा समेत चार लोगों को नामजद किया गया है।

एफआईआर में जेल अधीक्षक राजीव कुमार झा के अलावा जेल में बंद हरेश मिश्रा, कुबेर मिश्रा और कुख्यात अपराधी लंबू शर्मा के नाम शामिल हैं। विधायक ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि उनकी हत्या की योजना पूरी तरह तैयार की जा चुकी है और इसके लिए कथित तौर पर ग्रेनेड तथा टाइम बम की व्यवस्था तक किए जाने की जानकारी उन्हें मिली है। इन आरोपों की पुलिस जांच की जा रही है और अभी इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।

गुमनाम पत्र से सामने आया मामला

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विधायक को डाक के जरिए एक पत्र मिला था। पत्र में कथित तौर पर उन्हें चेतावनी दी गई कि भागलपुर जेल के भीतर उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है। पत्र में यह भी दावा किया गया कि हत्या की तैयारी पूरी कर ली गई है और विस्फोटक सामग्री की व्यवस्था की गई है। इसी पत्र को आधार बनाकर विधायक ने पुलिस से शिकायत की और प्राथमिकी दर्ज कराई।

विधायक की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में मामले को गंभीर बताते हुए पूरे षड्यंत्र की जांच और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में भागलपुर जेल प्रशासन से जुड़े अधिकारी का नाम सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है।

जेल अधीक्षक समेत चार नामजद

इस मामले में भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा के अधीक्षक राजीव कुमार झा समेत चार लोगों को नामजद किया गया है। भागलपुर जिला प्रशासन की आधिकारिक दूरभाष निर्देशिका में भी राजीव कुमार झा को विशेष केंद्रीय कारा का अधीक्षक बताया गया है।

जेल अधीक्षक जैसे पद पर तैनात अधिकारी के खिलाफ किसी जनप्रतिनिधि की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगना अपने आप में गंभीर मामला है। ऐसे में पुलिस जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि विधायक को मिला पत्र किसने भेजा, उसमें दी गई जानकारी का स्रोत क्या है और क्या वास्तव में जेल के भीतर से किसी तरह की साजिश की जा रही थी।

पुलिस के सामने कई सवाल

मामले की जांच में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। सबसे पहले उस गुमनाम पत्र की सत्यता और उसे भेजने वाले व्यक्ति की पहचान का पता लगाना चुनौती होगी। इसके अलावा विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

यदि विस्फोटक सामग्री की व्यवस्था किए जाने का दावा किया गया है तो जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि ऐसी सामग्री कहीं बरामद हुई या नहीं। साथ ही जेल में बंद आरोपितों की गतिविधियों, उनके संपर्कों और बाहरी लोगों से संभावित संपर्क की भी जांच की जा सकती है।

सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

भाजपा विधायक को हत्या की कथित साजिश की सूचना मिलने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। जनप्रतिनिधियों को धमकी मिलने के मामलों में पुलिस आमतौर पर शिकायत की गंभीरता के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करती है। इस मामले में भी जांच के साथ विधायक की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाने की संभावना है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के लिए यह भी जरूरी होगा कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जाए। खासकर जेल प्रशासन से जुड़े अधिकारी का नाम आने के कारण जांच में पारदर्शिता महत्वपूर्ण होगी।

जेल प्रशासन पर उठे सवाल

जेल के भीतर से किसी जनप्रतिनिधि की हत्या की साजिश रचे जाने के आरोप ने जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की गतिविधियों की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जेल सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक मानी जाएगी। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो गुमनाम पत्र के जरिए दहशत पैदा करने के पीछे की मंशा भी जांच का विषय होगी।

पुलिस अब प्राथमिकी में दर्ज आरोपों, पत्र की सामग्री और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करेगी। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

जांच के नतीजे पर टिकी नजर

फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विधायक की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने आरोपों की तह तक पहुंचने और पूरे मामले का सच सामने लाने की जिम्मेदारी है।

शाहपुर के भाजपा विधायक की हत्या की कथित साजिश और भागलपुर जेल अधीक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर के बाद बिहार की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं कि गुमनाम पत्र के पीछे कौन था, क्या वास्तव में हत्या की कोई योजना बनाई गई थी और एफआईआर में नामजद लोगों की इस कथित साजिश में कोई भूमिका थी या नहीं।

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