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बिहार को बड़ी सौगात, 32 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

Rajeshwari Nishad
16 Oct 2026 8:49 PM IST
बिहार को बड़ी सौगात, 32 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
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Bihar: बिहार में सड़क परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, सड़कों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण, बाईपास निर्माण और रेल ओवरब्रिज से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृति दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
बैठक में बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल सहित केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार और मौजूदा सड़कों की स्थिति बेहतर बनाने से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इन योजनाओं का उद्देश्य बिहार में सड़क संपर्क को मजबूत करना, यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास पर विशेष जोर
बैठक में बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों की क्षमता बढ़ाने और उनकी स्थिति सुधारने से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता दी गई। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते यातायात को देखते हुए सड़कों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की जरूरत महसूस की जा रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग किसी भी राज्य की परिवहन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। इनके माध्यम से विभिन्न जिलों, औद्योगिक क्षेत्रों, व्यापारिक केंद्रों और पड़ोसी राज्यों के बीच संपर्क स्थापित होता है।
बिहार में सड़क परिवहन का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग रोजाना रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करते हैं। ऐसे में सड़कों के विकास से आम लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
सड़क चौड़ीकरण से यातायात व्यवस्था होगी बेहतर
वार्षिक कार्ययोजना में राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण को प्रमुख स्थान दिया गया है। बिहार के कई मार्गों पर वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण यातायात का दबाव रहता है। विशेष रूप से बड़े शहरों को जोड़ने वाली सड़कों पर भारी वाहनों और यात्री वाहनों की आवाजाही अधिक होती है।
ऐसे मार्गों का चौड़ीकरण होने से यातायात की क्षमता बढ़ सकती है। इसके अलावा वाहनों की आवाजाही सुगम होने और यात्रा में लगने वाले समय में कमी आने की संभावना है।
चौड़ी सड़कों से मालवाहक वाहनों को भी सुविधा मिलेगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों और सामान की ढुलाई में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, किन मार्गों का कितने किलोमीटर तक चौड़ीकरण किया जाएगा, इसकी विस्तृत परियोजनावार जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बाईपास निर्माण से शहरों को मिलेगी जाम से राहत
राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ बाईपास निर्माण से संबंधित योजनाएं भी वार्षिक कार्ययोजना का हिस्सा हैं। बाईपास का निर्माण उन शहरों और कस्बों के लिए महत्वपूर्ण होता है, जहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं और भारी वाहनों के कारण यातायात प्रभावित होता है।
बाईपास बनने से लंबी दूरी के वाहनों को घनी आबादी वाले इलाकों से होकर नहीं गुजरना पड़ता। इससे स्थानीय सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है।
बिहार के कई शहरी क्षेत्रों में बाजार, शिक्षण संस्थान और आवासीय इलाकों के आसपास यातायात की समस्या रहती है। ऐसे स्थानों पर बाईपास निर्माण से यातायात व्यवस्था में सुधार हो सकता है।
इसके अलावा शहरों के भीतर प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में भी बेहतर सड़क नियोजन की भूमिका हो सकती है।
रेल ओवरब्रिज निर्माण को भी मिलेगा बढ़ावा
बैठक में रेल ओवरब्रिज यानी आरओबी से संबंधित परियोजनाओं को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है। रेल मार्गों और सड़कों के मिलान वाले स्थानों पर रेल ओवरब्रिज की विशेष आवश्यकता होती है।
रेलवे फाटकों पर ट्रेनों की आवाजाही के दौरान सड़क यातायात रोकना पड़ता है। इससे कई बार लंबा जाम लग जाता है और यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
रेल ओवरब्रिज बनने से सड़क यातायात को रेलवे क्रॉसिंग पर रुकने की आवश्यकता कम हो जाती है। इससे यात्रियों के समय की बचत होने के साथ आवागमन अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
विशेष रूप से एंबुलेंस, स्कूली वाहनों और आवश्यक सामान की आपूर्ति करने वाले वाहनों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिल सकता है।
सड़क सुदृढ़ीकरण से पुराने मार्गों की स्थिति सुधरेगी
नई सड़क परियोजनाओं के अलावा पहले से मौजूद राष्ट्रीय
राजमार्गों
को मजबूत बनाने पर भी ध्यान दिया गया है। सड़क सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, सड़क की संरचना को बेहतर बनाने और उसकी भार वहन क्षमता बढ़ाने जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और मौसम के प्रभाव के कारण सड़कों की स्थिति प्रभावित होती है। विशेष रूप से बरसात के मौसम में क्षतिग्रस्त सड़कों से यातायात बाधित होने की समस्या सामने आती है।
ऐसे में मजबूत और टिकाऊ सड़कें तैयार करना महत्वपूर्ण माना जाता है। सड़क सुदृढ़ीकरण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ वाहनों के संचालन में भी सुधार होने की उम्मीद है।
व्यापार और उद्योग को मिल सकता है फायदा
बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास का प्रभाव केवल यातायात व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी गति दे सकता है।
कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने, उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार सामान को दूसरे राज्यों में भेजने के लिए सड़क संपर्क महत्वपूर्ण होता है।
सड़क परियोजनाओं के विकास से परिवहन लागत कम होने और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। इसके अलावा निर्माण कार्यों के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
केंद्र सरकार ने भी हाल में बिहार में हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के माध्यम से संपर्क, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिया है।
परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
वार्षिक कार्ययोजना के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण संबंधित परियोजनाओं के क्रियान्वयन का होगा। सड़क निर्माण की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, तकनीकी प्रक्रियाओं, भूमि उपलब्धता और आवश्यक अनुमतियों जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है। परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करना संबंधित विभागों के लिए अहम रहेगा।
बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की अन्य परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उदाहरण के तौर पर मुजफ्फरपुर-सोनबरसा राष्ट्रीय राजमार्ग के 82.578 किलोमीटर हिस्से को चार लेन बनाने के लिए अगस्त 2026 में 3,590.73 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई थी।
बिहार के सड़क नेटवर्क को मिलेगी नई दिशा
वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, बाईपास निर्माण, रेल ओवरब्रिज और सड़कों के सुदृढ़ीकरण से राज्य के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
इन योजनाओं के माध्यम से सड़क यातायात को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने का लक्ष्य है। हालांकि, करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये की बताई गई कुल स्वीकृति का स्वतंत्र आधिकारिक दस्तावेज और परियोजनावार विवरण फिलहाल उपलब्ध नहीं हो सका है। इसलिए इस राशि को तत्काल जारी बजट या सभी परियोजनाओं की अंतिम निर्माण स्वीकृति के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
आने वाले समय में परियोजनाओं की विस्तृत सूची, लागत और निर्माण की समयसीमा स्पष्ट होने पर यह पता चल सकेगा कि बिहार के किन जिलों और राष्ट्रीय राजमार्गों को इस कार्ययोजना का सीधा लाभ मिलेगा।
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