बिहार

सुधा डेरी से फरदो तक बिछेगी ड्रेनेज पाइपलाइन किसानों को मिलेगी राहत

nidhi
5 Sept 2026 9:27 AM IST
सुधा डेरी से फरदो तक बिछेगी ड्रेनेज पाइपलाइन किसानों को मिलेगी राहत
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दूषित पानी की समस्या

मुजफ्फरपुर: कांटी प्रखंड के सदातपुर स्थित सुधा डेरी प्लांट से निकलने वाले केमिकलयुक्त दूषित पानी की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ी पहल की गई है। डेरी से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए सुधा डेरी से फरदो तक करीब 2.4 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज पाइपलाइन बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (तिमुल) के प्रबंध निदेशक फूल झा ने प्रस्ताव तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह को भेजा है।

सर्वे के बाद तय हुआ 2.4 किमी का रूट
सुधा डेरी के दूषित पानी की निकासी को लेकर सर्वे कराया गया था। सर्वे के बाद डेरी से फरदो तक करीब 2.4 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज पाइपलाइन का रूट तय किया गया। इस पाइपलाइन के निर्माण में रेलवे, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और जिला प्रशासन की जमीन का भी उपयोग करना पड़ेगा। संबंधित विभागों से सहयोग मांगा गया है। प्रस्तावित पाइपलाइन एम/एस एल शिव ट्रेडर्स, दुर्गा ट्रेवल्स, सदातपुर, अनमोल इंटरप्राइजेज, अली अहमद चौक और आलम जनरल स्टोर के आसपास के क्षेत्र से होकर आगे बढ़ेगी। इसके बाद इसे फरदो नाले तक पहुंचाया जाएगा।
एनएच के कल्वर्ट से निकाली जाएगी पाइपलाइन
प्रस्ताव के अनुसार डेरी के पास स्थित NHAI पुल के अंतिम हिस्से से पाइपलाइन को दक्षिण दिशा में ले जाया जाएगा। सड़क के नीचे बने कल्वर्ट का इस्तेमाल कर ड्रेनेज पाइप आगे बढ़ाने की योजना है। इसके बाद पहले से बने पक्के नाले के समीप से पाइपलाइन रेलवे क्रॉसिंग की दिशा में जाएगी। रेलवे क्रॉसिंग से करीब 100 मीटर पहले रेलवे का एक अंडरपास मौजूद है। इसी अंडरपास के माध्यम से पाइपलाइन को रेलवे ट्रैक के दूसरी तरफ पहुंचाने की योजना बनाई गई है। वहां से जिला प्रशासन की जमीन का इस्तेमाल करते हुए ड्रेनेज लाइन को फरदो नाले तक ले जाया जाएगा।
40 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने का दावा
सुधा डेरी से निकलने वाले कथित केमिकलयुक्त पानी की समस्या लंबे समय से स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार इससे करीब 40 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने और 1100 से ज्यादा लीची के पेड़ों को नुकसान पहुंचने की शिकायत की गई है। स्थानीय लोगों की शिकायत रही है कि डेरी से निकलने वाला पानी आसपास के खेतों में पहुंचने से खेती प्रभावित हो रही है। किसानों ने इस समस्या के स्थायी समाधान के साथ नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई है।
विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचा था मामला
दूषित पानी का मामला स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। कांटी विधायक अजीत कुमार के नेतृत्व में प्रभावित लोगों की समस्या बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार तक पहुंचाई गई थी। इसके बाद मामले का समाधान निकालने के लिए तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त को आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। इसके बाद आयुक्त की अध्यक्षता में बैठक हुई और समस्या के समाधान के लिए दो उच्चस्तरीय समितियां गठित की गईं। एक समिति को डेरी के ट्रीटमेंट प्लांट और निकलने वाले पानी की गुणवत्ता की जांच का जिम्मा दिया गया, जबकि दूसरी समिति को सुरक्षित जल निकासी के लिए जमीन और संभावित मार्ग का सर्वे करना था।
ट्रीटमेंट के बाद ही पानी छोड़ने पर जोर
प्रस्तावित पाइपलाइन का उद्देश्य केवल दूषित पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना नहीं है। पानी को निर्धारित मानकों के अनुसार उपचारित करने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन की पूर्व योजना में पानी की गुणवत्ता की जांच और ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यप्रणाली की समीक्षा का प्रावधान रखा गया है। PHED के स्तर से पानी के नमूनों की जांच कराने की बात भी सामने आई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निकासी के बाद पानी पर्यावरण और आसपास की कृषि भूमि के लिए नई समस्या न पैदा करे।
किसानों को स्थायी समाधान की उम्मीद
2.4 किलोमीटर की ड्रेनेज पाइपलाइन तैयार होने के बाद सुधा डेरी से निकलने वाले पानी को नियंत्रित तरीके से फरदो तक पहुंचाने का रास्ता बन सकता है। इससे आसपास के खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पानी फैलने की समस्या कम होने की उम्मीद है।
हालांकि योजना की सफलता पाइपलाइन निर्माण के साथ-साथ पानी के प्रभावी ट्रीटमेंट और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगी। प्रशासन ने इससे पहले समस्या के समाधान के लिए जरूरी संरचनाओं का निर्माण 15 सितंबर से शुरू कराने का लक्ष्य रखा था। फिलहाल सर्वे के बाद पाइपलाइन का प्रस्ताव और रूट तैयार हो चुका है। अब रेलवे, NHAI और जिला प्रशासन समेत संबंधित एजेंसियों के समन्वय से योजना को जमीन पर उतारना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। लंबे समय से दूषित पानी की समस्या झेल रहे किसानों और स्थानीय लोगों को इस परियोजना से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।
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