Bihar कैबिनेट बैठक में 45 एजेंडों को मंजूरी, एआई, शिक्षा, न्याय और विकास परियोजनाओं पर बड़े फैसले
Bihar: पटना में मुख्य सचिवालय के कैबिनेट हॉल में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें कुल 45 एजेंडों को मंजूरी दी गई। बैठक में आईटी मंत्री नीतीश मिश्रा ने एआई से जुड़े फैसलों की जानकारी दी और कई बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू को मंजूरी मिलने की बात कही।
कैबिनेट में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, कोरओवर और एक्सोनवाइज प्राइवेट लिमिटेड के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता करने का निर्णय लिया गया है। इससे राज्य में प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच के लिए रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में जांच आयोग के गठन को मंजूरी दी गई। शिक्षा क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 को स्वीकृति दी गई है, जिसके तहत प्रारंभिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षकों के तबादले को नियमित किया जाएगा।
कैबिनेट ने राज्य में कई नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को भी मंजूरी दी है। इनमें मधुबनी में शांजा विश्वविद्यालय, सिवान में निजी विश्वविद्यालय, नवादा में एसए विश्वविद्यालय, पटना में हिमालय विश्वविद्यालय और औरंगाबाद में सीतयोग विश्वविद्यालय शामिल हैं।
न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए चार जिलों में नए न्यायालय भवनों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इनमें महाराजगंज, मोतिहारी, बेगूसराय और रजौली शामिल हैं, जहां करोड़ों रुपये की लागत से कोर्ट भवन, एमेनिटी भवन और हाजत भवन बनाए जाएंगे।
छपरा में अमृत 2.0 योजना के तहत ₹76.48 करोड़ की लागत से सीवरेज नेटवर्क परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिससे शहर की स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी।
इसके अलावा बिहार यात्रा भत्ता नियमावली में संशोधन, ग्रीन फील्ड सैटलाइट टाउनशिप के लिए एक लाख करोड़ रुपये के ऋण हेतु हडको के साथ एमओयू और कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।
कृषि विकास योजनाओं के तहत परंपरागत कृषि विकास योजना, तेलहनी फसलों को बढ़ावा देने और कृषि विस्तार कार्यक्रमों के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी गई है।
कुल मिलाकर यह कैबिनेट बैठक राज्य में तकनीक, शिक्षा, न्याय व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।







