बिहार

मधुबनी में बनेंगी 355 नई दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियां, 88 का गठन पूरा

Kavita2
30 Sept 2026 5:54 PM IST
मधुबनी में बनेंगी 355 नई दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियां, 88 का गठन पूरा
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मधुबनी। जिले में दुग्ध उत्पादन और दूध संग्रह के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 355 नई दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियों के गठन का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत 25 सितंबर तक जिले में 88 नई समितियों का गठन किया जा चुका है। इसके साथ ही वर्षों से बंद पड़ी पुरानी समितियों को दोबारा सक्रिय करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।

मिथिला दुग्ध उत्पादक सहयोग संघ की ओर से नई समितियों का गठन ऐसे गांवों में किया जा रहा है, जहां वर्तमान में कोई दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति संचालित नहीं है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों को संगठित दुग्ध संग्रह व्यवस्था से जोड़ना और उन्हें दूध बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन और दूध उत्पादन से जुड़े हुए हैं। लेकिन कई गांवों में संगठित दुग्ध संग्रह केंद्र नहीं होने के कारण पशुपालकों को दूध बेचने के लिए निजी खरीदारों पर निर्भर रहना पड़ता है। नई समितियों के गठन से ऐसे किसानों और पशुपालकों को गांव के पास ही दूध की बिक्री की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 355 समितियों के लक्ष्य के मुकाबले 25 सितंबर तक 88 समितियां गठित की जा चुकी हैं। अब शेष गांवों में भी चरणबद्ध तरीके से समितियों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

नई समिति गठित करने से पहले संबंधित गांव में दूध उत्पादन की स्थिति, पशुपालकों की संख्या और दूध संग्रह की संभावनाओं का आकलन किया जाता है। इसके बाद स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को समिति से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होती है।

मिथिला दुग्ध उत्पादक सहयोग संघ का प्रयास है कि जिन क्षेत्रों में अभी तक संगठित दूध संग्रह व्यवस्था नहीं पहुंच पाई है, वहां इस वित्तीय वर्ष में नेटवर्क का विस्तार किया जाए।

इसके साथ ही पुरानी और निष्क्रिय समितियों को दोबारा शुरू करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न कारणों से जिले में कई समितियां वर्षों से बंद पड़ी थीं। इनमें से करीब 20 समितियों को अब तक पुनर्जीवित कर दोबारा सक्रिय किया जा चुका है।

पुरानी समितियों को सक्रिय करने से पहले उनकी स्थिति की समीक्षा की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि समिति के बंद होने की वजह क्या थी और वर्तमान समय में संबंधित क्षेत्र में दूध उत्पादन तथा संग्रह की कितनी संभावना है।

जहां स्थानीय पशुपालक दोबारा समिति के संचालन के लिए तैयार हैं, वहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर दूध संग्रह शुरू कराया जा रहा है।

समितियों के माध्यम से दूध की नियमित खरीद होने पर किसानों को अपने उत्पाद के लिए एक तय बाजार मिल सकता है। इससे दूध बेचने के लिए उन्हें दूर के बाजारों तक जाने की जरूरत कम होगी।

दुग्ध सहयोग समितियां पशुपालकों और दुग्ध संघ के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं। गांवों से दूध एकत्र कर उसे आगे प्रसंस्करण और विपणन के लिए भेजा जाता है।

संगठित व्यवस्था के कारण दूध की गुणवत्ता की जांच और मात्रा का रिकॉर्ड भी रखा जा सकता है। इससे पशुपालकों को उनके द्वारा दिए गए दूध के आधार पर भुगतान की व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलती है।

जिले में नई समितियों की संख्या बढ़ने से दूध संग्रह की कुल क्षमता भी बढ़ने की संभावना है। अभी जिन गांवों का दूध संगठित नेटवर्क से बाहर है, उन्हें इसमें शामिल किया जा सकेगा।

मधुबनी में पशुपालन कृषि के साथ ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण साधन है। किसान खेती के साथ गाय और भैंस पालन कर नियमित आय हासिल करते हैं।

दूध की बिक्री प्रतिदिन होने के कारण यह किसानों के लिए नकदी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनती है। ऐसे में गांव स्तर पर नियमित दूध खरीद की व्यवस्था मजबूत होने से छोटे पशुपालकों को भी लाभ मिल सकता है।

नई समितियों के गठन के साथ सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। स्थानीय किसानों और पशुपालकों को समिति से जुड़ने और इसके माध्यम से दूध बेचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

समितियों के बेहतर संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार लोगों का चयन किया जाता है। उनका काम दूध संग्रह, रिकॉर्ड और संबंधित व्यवस्थाओं को संभालना होता है।

वहीं दुग्ध संघ की ओर से समितियों को आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। दूध की गुणवत्ता जांचने और संग्रह व्यवस्था के लिए जरूरी उपकरण भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

नई समितियों के गठन के बाद दूध संग्रह के लिए नियमित समय तय किया जाएगा, ताकि पशुपालक निर्धारित समय पर दूध केंद्र तक पहुंचा सकें।

यह व्यवस्था विशेष रूप से छोटे पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण होगी, जिनके पास रोजाना सीमित मात्रा में दूध बिक्री के लिए उपलब्ध होता है।

जिले के ऐसे गांवों की पहचान प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है, जहां पर्याप्त संख्या में दुधारू पशु हैं लेकिन आसपास दुग्ध समिति मौजूद नहीं है।

355 नई समितियों का लक्ष्य पूरा होने के बाद जिले में दुग्ध संग्रह नेटवर्क का दायरा काफी बढ़ सकता है। इससे नए गांव सीधे मिथिला दुग्ध उत्पादक सहयोग संघ से जुड़ जाएंगे।

पुरानी 20 समितियों का पुनर्जीवित होना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे नए ढांचे पर खर्च करने के बजाय पहले से मौजूद व्यवस्था का दोबारा उपयोग किया जा सकेगा।

हालांकि समितियों के लंबे समय तक सफल संचालन के लिए नियमित दूध संग्रह, समय पर भुगतान और स्थानीय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

नई समिति बनाने के बाद उसका नियमित संचालन बनाए रखना भी चुनौती होगी। इसके लिए संघ की ओर से समितियों की गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।

फिलहाल 355 नई समितियां बनाने के लक्ष्य की दिशा में 88 समितियां गठित हो चुकी हैं और बंद पड़ी करीब 20 समितियों को दोबारा सक्रिय किया जा चुका है।

मिथिला दुग्ध उत्पादक सहयोग संघ की योजना है कि वित्तीय वर्ष के दौरान ज्यादा से ज्यादा ऐसे गांवों को दुग्ध सहकारिता नेटवर्क से जोड़ा जाए, जहां अभी तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इस पहल से मधुबनी में दूध उत्पादन के साथ संग्रह व्यवस्था को मजबूत करने, पशुपालकों को स्थानीय बाजार उपलब्ध कराने और ग्रामीण परिवारों की नियमित आय के अवसर बढ़ाने की उम्मीद है।

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