बिहार

111 साल पुराना गोह थाना बदहाल, ऐतिहासिक भवन पर मंडरा रहा खतरा

Saba Naaz
28 July 2026 3:47 PM IST
111 साल पुराना गोह थाना बदहाल, ऐतिहासिक भवन पर मंडरा रहा खतरा
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औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले का ऐतिहासिक गोह थाना भवन आज अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1915 में निर्मित यह भवन 111 साल बाद जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। कभी आजादी के आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा यह थाना भवन अब खुद संरक्षण और मरम्मत की राह देख रहा है। बरसात के मौसम में भवन की छत से पानी टपकने के कारण पुलिसकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।

गोह थाना भवन का ऐतिहासिक महत्व काफी पुराना है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इस भवन ने स्वतंत्रता संग्राम की एक बड़ी घटना देखी थी। बताया जाता है कि उस समय गोह क्षेत्र के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के विरोध में थाना भवन को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना में गोह प्रखंड मुख्यालय निवासी सीताराम तिवारी, रामदेव सिंह, पुरुषोत्तम लाल अग्रवाल और अनूप दूबे को छह माह से अधिक समय तक कारावास की सजा भुगतनी पड़ी थी। देश आजाद होने के बाद सीताराम तिवारी और रामदेव सिंह को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया गया।

इतिहास से जुड़े इस भवन की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। भवन की छत जर्जर हो चुकी है और बारिश के दौरान पानी अंदर तक पहुंच जाता है। इससे थाने में रखे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों के खराब होने का खतरा बना रहता है। पुलिसकर्मियों को हर बारिश में दस्तावेजों को बचाने की चिंता सताती रहती है।

थाना परिसर में अन्य सुविधाओं की भी कमी है। जब्त किए गए वाहनों को रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में कई बड़े वाहनों को थाना के मुख्य द्वार के पास गया-दाउदनगर एनएच-120 सड़क किनारे खड़ा करना पड़ता है। इससे सड़क पर जाम की समस्या उत्पन्न होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

थाना परिसर में चौकीदारों के रहने के लिए बनाया गया भवन भी पूरी तरह खराब हो चुका है। भवन गिर जाने के बाद चौकीदारों को बरामदे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गोह थाना केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर है। समाजसेवी प्रेमचंद तिवारी, डॉ. अशोक कुमार, विंदेश्वरी शर्मा और वंशी प्रसाद गुप्ता समेत कई लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस ऐतिहासिक भवन के संरक्षण के लिए जल्द कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि भवन की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस नया थाना भवन बनाया जाना चाहिए।

जेपी सेनानी सह गोह निवासी अरविंद पाण्डेय ने बताया कि गोह थाना का क्षेत्र पहले काफी बड़ा हुआ करता था। बाद में इसके क्षेत्रफल को विभाजित कर देवकुंड, उपहारा और बंदेया थाना स्थापित किए गए। उन्होंने कहा कि गोह थाना क्षेत्र का स्वतंत्रता आंदोलन में भी अहम योगदान रहा है, इसलिए इस भवन को संरक्षित करना जरूरी है।

थानाध्यक्ष ने भी माना कि जर्जर भवन में काम करना काफी मुश्किल हो गया है। जनता की शिकायतें सुनने और पुलिस कार्यों को संचालित करने में भी परेशानी आती है। बारिश के दिनों में छत से पानी गिरने के कारण सुरक्षा और रिकॉर्ड संरक्षण बड़ी चुनौती बन जाती है।

स्थानीय लोगों और पुलिस प्रशासन की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द इस ऐतिहासिक थाना भवन की स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाए। लोगों का कहना है कि एक ओर जहां यह भवन स्वतंत्रता आंदोलन की यादों को संजोए हुए है, वहीं दूसरी ओर इसकी जर्जर हालत प्रशासनिक अनदेखी को भी दर्शाती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए कब ठोस पहल करती है।

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