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Guwahati गुवाहाटी: सोशल वेलफेयर और तकनीक के प्रभावी उपयोग का एक सकारात्मक उदाहरण असम में सामने आया है, जहां यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) की मदद से एक लापता दिव्यांग बच्ची को उसके परिवार से मिलाया गया। यह मामला 2025 से चल रही खोज के बाद 25 अप्रैल, 2026 को सफल पुनर्मिलन में समाप्त हुआ।
पीआईबी गुवाहाटी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह बच्ची असम के चराईदेव जिले स्थित बोरहाट टी एस्टेट की निवासी है। बच्ची मानसिक रूप से दिव्यांग है और वह बोलकर संवाद नहीं कर सकती, जिससे उसकी पहचान और परिवार से संपर्क स्थापित करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था।
जानकारी के अनुसार, बच्ची लंबे समय से अपने घर से अलग थी और उसकी पहचान स्थापित करने में कई कठिनाइयां आ रही थीं। ऐसे में तकनीक आधारित पहचान प्रणाली और विभिन्न संस्थानों के संयुक्त प्रयासों ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई।
UIDAI की सहायता से बच्ची की पहचान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, जिसमें उसके उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य संबंधित जानकारी का मिलान किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे उसकी पहचान सुनिश्चित की गई और उसे उसके परिवार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई।
इस पूरी प्रक्रिया में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, स्थानीय पुलिस और चाइल्ड केयर संस्थानों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी एजेंसियों ने मिलकर समन्वय के साथ काम किया ताकि बच्ची की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला एक उदाहरण है कि कैसे तकनीक और प्रशासनिक सहयोग मिलकर सामाजिक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। UIDAI की पहचान प्रणाली ने इस प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने में मदद की।
पुनर्मिलन के दिन बच्ची को सुरक्षित रूप से उसके परिवार को सौंप दिया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं की मौजूदगी में सभी कानूनी और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बच्ची के परिवार को जब उसकी पहचान की पुष्टि हुई, तो यह उनके लिए भावनात्मक क्षण था। लंबे समय से लापता होने के कारण परिवार काफी परेशान था।
इस मामले ने यह भी दिखाया कि कमजोर और विशेष जरूरतों वाले लोगों की पहचान और सुरक्षा के लिए मजबूत सिस्टम कितना जरूरी है। मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के मामले में ऐसी तकनीकी सहायता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी सामने आ सकती हैं, इसलिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और तकनीकी उपयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
UIDAI की भूमिका को इस मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उनकी पहचान प्रणाली ने जटिल परिस्थितियों में भी समाधान निकालने में मदद की।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने भी इस प्रयास की सराहना की और कहा कि इस तरह के मामलों में त्वरित कार्रवाई और सहयोगात्मक दृष्टिकोण बेहद जरूरी है।
स्थानीय पुलिस ने भी कहा कि इस पूरे अभियान में सभी एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल रहा, जिससे बच्ची को सुरक्षित रूप से उसके परिवार तक पहुंचाया जा सका।
यह घटना असम में सामाजिक सुरक्षा और तकनीकी उपयोग के एक सफल उदाहरण के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले समय में ऐसे अन्य मामलों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।
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