असम

पवन खेड़ा को SC से राहत, मानहानि और जालसाजी मामले में अग्रिम जमानत मंजूर

Kavita2
1 May 2026 4:15 PM IST
पवन खेड़ा को SC से राहत, मानहानि और जालसाजी मामले में अग्रिम जमानत मंजूर
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Assam असम: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मानहानि और जालसाजी से जुड़े एक आपराधिक मामले में बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) प्रदान की। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा की शिकायत पर आधारित है।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की पीठ ने की। इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा की गिरफ्तारी से सुरक्षा देने की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, और इस स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (पर्सनल लिबर्टी) को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “संविधान के आर्टिकल 21 के तहत किसी व्यक्ति की पर्सनल लिबर्टी को इस समय आसानी से खतरे में नहीं डाला जा सकता।”

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि पवन खेड़ा को गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें जांच अधिकारी द्वारा तय की गई शर्तों के आधार पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने उनके लिए कुछ शर्तें भी तय कीं।

कोर्ट ने कहा कि पवन खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और जब भी जांच अधिकारी बुलाएंगे, उन्हें उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा। इसके अलावा उन्हें किसी भी तरह से गवाहों या सबूतों को प्रभावित करने या हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वह बिना अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे और यदि उन्हें विदेश यात्रा करनी है तो पहले अदालत से अनुमति लेनी होगी।

यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जुड़ा होने के कारण पहले से ही चर्चा में था। अदालत के इस फैसले के बाद पवन खेड़ा को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है, लेकिन जांच प्रक्रिया जारी रहेगी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जांच प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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