असम

प्रणब डोले पर NSA लागू, जमानत के बाद भी हिरासत जारी

Kavita2
1 Aug 2026 9:58 AM IST

गुवाहाटी। असम में आदिवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता प्रणब डोले को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया गया है। यह कार्रवाई उन्हें एक अदालत से जमानत मिलने के एक दिन बाद की गई। डोले काजीरंगा नेशनल पार्क के पास प्रस्तावित फाइव-स्टार होटल परियोजना के विरोध से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए गए थे। अब राज्य सरकार के आदेश के बाद उन्हें NSA के तहत हिरासत में रखा गया है।

सरकारी आदेश के अनुसार, राज्य सरकार ने प्रणब डोले की गतिविधियों को सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया है। आदेश में कहा गया है कि सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि यदि डोले को रिहा किया जाता है तो उनके द्वारा ऐसी गतिविधियों को जारी रखने की वास्तविक और निकट संभावना बनी हुई है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, प्रणब डोले को 13 जुलाई को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें गोलाघाट जिला जेल में रखा गया था। यह मामला जून महीने में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें काजीरंगा नेशनल पार्क के निकट प्रस्तावित फाइव-स्टार होटल परियोजना का विरोध किया गया था।

डोले की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों और आदिवासी अधिकार संगठनों ने इसे लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया गया था और कार्यकर्ता को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और किसी भी ऐसी गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिससे सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो।

अदालत ने बुधवार को जून में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में प्रणब डोले को जमानत दे दी थी। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद वह जेल से बाहर नहीं आ सके, क्योंकि अगले ही दिन राज्य सरकार ने उनके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई कर दी। इसके चलते उनकी हिरासत उसी जेल में जारी रही।

नेशनल सिक्योरिटी एक्ट एक ऐसा कानून है, जिसके तहत सरकार किसी व्यक्ति को कुछ परिस्थितियों में निवारक हिरासत (preventive detention) में रख सकती है। इसका उद्देश्य उन गतिविधियों को रोकना होता है, जिनसे देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका हो। इस कानून के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को कुछ समय तक बिना सामान्य आपराधिक मुकदमे के भी रखा जा सकता है।

सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डोले की गतिविधियां राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिकूल थीं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि उनकी रिहाई के बाद ऐसी गतिविधियां दोबारा होने की संभावना है। इसी आधार पर प्रशासन ने NSA के तहत कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

यह मामला काजीरंगा नेशनल पार्क के आसपास प्रस्तावित होटल परियोजना को लेकर हुए विरोध से जुड़ा है। पर्यावरण और स्थानीय समुदायों से जुड़े कुछ समूहों ने इस परियोजना को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

प्रणब डोले लंबे समय से आदिवासी अधिकारों और स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि वह क्षेत्र के लोगों की आवाज उठाते रहे हैं। वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि किसी भी आंदोलन या विरोध के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है और यदि किसी की गतिविधियों से शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो तो कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

इस घटनाक्रम के बाद असम में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों की नजर अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। वहीं, प्रशासन अपनी कार्रवाई को कानून के तहत उठाया गया कदम बता रहा है।

फिलहाल प्रणब डोले गोलाघाट जिला जेल में ही हिरासत में हैं। उनके खिलाफ NSA के तहत आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर अदालतों और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी।

काजीरंगा के पास होटल परियोजना का विरोध, कार्यकर्ता की गिरफ्तारी और उसके बाद NSA लागू किए जाने की कार्रवाई ने राज्य में विकास परियोजनाओं, स्थानीय अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है।

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