
गुवाहाटी। असम में बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है, लेकिन कई इलाकों में अब भी संकट बना हुआ है। शुक्रवार को जारी सरकारी बुलेटिन के अनुसार, राज्य में इस साल बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 82 हो गई है। वहीं, बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या घटकर करीब 1.92 लाख रह गई है। असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया कि हाल की दो मौतों के बाद बाढ़ से होने वाली कुल मौतों का आंकड़ा बढ़ा है।
ASDMA के बुलेटिन के मुताबिक, बाढ़ के कारण हुई दो नई मौतों में से एक घटना शिवसागर जिले के नजीरा रेवेन्यू सर्कल में हुई, जबकि दूसरी मौत चराइदेव जिले के सोनारी क्षेत्र में दर्ज की गई। इन घटनाओं के बाद राज्य में इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 82 हो गई है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी व्यक्ति के लापता होने की सूचना नहीं है।
राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, जिसके कारण प्रभावित लोगों की संख्या में कमी आई है। हालांकि, अभी भी कई जिले बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव और चराइदेव जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों के 17 रेवेन्यू सर्कल और 379 गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अभी भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित है, जबकि कुछ इलाकों में दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है।
असम में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ एक बड़ी प्राकृतिक आपदा बनकर सामने आती है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण राज्य के निचले इलाकों में पानी भर जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन, कृषि और पशुधन पर व्यापक असर पड़ता है।
इस वर्ष भी भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी। शुरुआत में प्रभावित क्षेत्रों की संख्या काफी अधिक थी, लेकिन अब पानी घटने के साथ स्थिति में कुछ सुधार देखा जा रहा है। हालांकि, प्रशासन अभी भी सतर्क है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी जारी रखे हुए है।
राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं। प्रभावित लोगों को भोजन, पेयजल, दवाएं और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों के माध्यम से भी लोगों को सहायता दी जा रही है।
बाढ़ के कारण सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में लोग खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है और कई जगहों पर पशुधन भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और नदियों के जलस्तर के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। प्रशासन ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि असम में बाढ़ की समस्या का समाधान केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं हो सकता। इसके लिए लंबे समय की योजनाओं, नदी प्रबंधन, तटबंधों की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। हर साल आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए वैज्ञानिक और स्थायी उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल राज्य में बाढ़ की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन कई क्षेत्रों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। प्रशासन प्रभावित जिलों में राहत कार्य जारी रखे हुए है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है।
असम में इस वर्ष बाढ़ से 82 लोगों की मौत होना इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि प्रभावित लोगों की संख्या में कमी आई है, लेकिन 1.92 लाख लोगों का प्रभावित होना बताता है कि राज्य के कई परिवार अभी भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। आने वाले दिनों में मौसम और नदियों के जलस्तर के आधार पर स्थिति में और सुधार की उम्मीद की जा रही है।





