
Assam असम: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही एक काउंटर-रेडिकलाइज़ेशन सेल का गठन करेगी। इस कदम का उद्देश्य राज्य के युवाओं को चरमपंथी विचारधाराओं और गुमराह करने वाले प्रभावों से सुरक्षित रखना बताया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार किसी भी ऐसे प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी, जिसमें युवाओं को बहकाकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाए। उन्होंने कहा कि असम सरकार इस दिशा में सख्त और निर्णायक कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से इस फैसले की जानकारी साझा की। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार किसी भी समूह या व्यक्ति को युवाओं को गुमराह करने और उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने की अनुमति नहीं देगी।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि असम ऐसे किसी भी प्रयास का “कड़ा जवाब” देगा जो युवाओं को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश करेगा। उनके इस बयान को राज्य में सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को लेकर सरकार की गंभीरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित काउंटर-रेडिकलाइज़ेशन सेल का मुख्य कार्य ऐसे तत्वों की पहचान करना होगा जो युवाओं को चरमपंथी विचारों की ओर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही यह सेल जागरूकता अभियान, काउंसलिंग और निगरानी व्यवस्था जैसे उपायों पर भी काम कर सकता है।
राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने के प्रयास बढ़े हैं, जिससे सतर्क रहने की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। ऐसे में यह नया तंत्र एक रोकथामात्मक ढांचे के रूप में कार्य करेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि सरकार केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऐसे मामलों को शुरुआत में ही रोकने के लिए सक्रिय रणनीति अपनाएगी। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही दिशा देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल सुरक्षा और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और संवेदनशीलता आवश्यक होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में जहां समय-समय पर सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं, वहां इस तरह की संस्थागत व्यवस्था का गठन सरकार की रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
विपक्षी दलों और नागरिक समाज की प्रतिक्रिया अभी इस घोषणा पर सामने नहीं आई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर आगे व्यापक चर्चा हो सकती है।
सरकार के अनुसार, यह सेल राज्य के शिक्षा संस्थानों, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा ताकि किसी भी संभावित खतरे की समय रहते पहचान और रोकथाम की जा सके।
असम सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार आधारित कार्यक्रमों को भी और मजबूत किया जाएगा।
कुल मिलाकर, काउंटर-रेडिकलाइज़ेशन सेल की स्थापना को राज्य में एक नीतिगत और सुरक्षा-आधारित कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को सुरक्षित, जागरूक और सशक्त बनाना है।





