
Assam असम: असम के लोकप्रिय गायक ज़ुबीन गर्ग के लिए न्याय की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आई। शनिवार शाम नागांव शहर के ज़ुबीन उद्यान में एक बड़ी सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सिंगर के समर्थकों, प्रशंसकों और सामाजिक संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए उनके लिए न्याय की नई अपील की।
इस मौके पर सिंगर की पत्नी गरिमा गर्ग, ट्रिब्यूट बैंड ‘जोंट्रो’ के सदस्य और नागांव के विधायक रूपक सरमा भी मौजूद रहे। सभी ने ज़ुबीन गर्ग की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान माहौल भावुक और गंभीर रहा, जहां बड़ी संख्या में लोग गायक के योगदान और उनकी विरासत को याद करते नजर आए।
‘जोंट्रो’ एक ट्रिब्यूट बैंड है जिसे ज़ुबीन गर्ग के पुराने साथियों और उनके कोर म्यूज़िशियंस ने मिलकर बनाया है, जिसका उद्देश्य उनके संगीत और यादों को जीवित रखना है। सभा में बैंड के सदस्यों ने भी गायक के प्रति सम्मान व्यक्त किया और उनके योगदान को असमिया संगीत की पहचान बताया।
सभा को संबोधित करते हुए गरिमा गर्ग ने न्याय मिलने में हो रही देरी पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर ज़ुबीन गर्ग जैसे प्रतिष्ठित कलाकार को न्याय नहीं मिल सकता, तो आम लोगों के लिए न्याय की उम्मीद और भी कमजोर हो जाती है।
अपने संबोधन में उन्होंने भावुक होकर कहा, “अगर ज़ुबीन गर्ग को न्याय नहीं मिलेगा, तो किसे मिलेगा?” उनके इस बयान ने सभा में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि यदि उनके मामले में भी न्याय सुनिश्चित नहीं होता, तो समाज को अपने शब्दकोश से ‘न्याय’ जैसे शब्द पर ही सवाल उठाना चाहिए।
इस बयान के बाद सभा में मौजूद लोगों ने भी न्याय की मांग को लेकर समर्थन जताया और सरकार से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की अपील की। कई प्रशंसकों ने कहा कि ज़ुबीन गर्ग न केवल एक गायक थे, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा भी थे।
विधायक रूपक सरमा ने भी इस मौके पर कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को संबंधित स्तर पर उठाया जाएगा।
सभा में मौजूद लोगों ने यह भी कहा कि ज़ुबीन गर्ग के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और उनके लिए न्याय सुनिश्चित करना समाज और व्यवस्था दोनों की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में लोगों ने एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग को दोहराया और उनकी स्मृति को सम्मान देने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान ज़ुबीन गर्ग के गीतों की गूंज भी सुनाई देती रही, जिससे माहौल और भी भावनात्मक हो गया।





