अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल सीमा पर PLA की गतिविधियों को लेकर मचा हड़कंप

Ratna Netam
12 Aug 2026 7:28 PM IST
अरुणाचल सीमा पर PLA की गतिविधियों को लेकर मचा हड़कंप
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नई दिल्ली : अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग सेक्टर में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की कथित घुसपैठ और भारतीय जवानों को गश्त करने से रोकने के दावों पर भारतीय सेना ने स्थिति स्पष्ट की है। सेना से जुड़े शीर्ष सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि भारत ने क्षेत्र में अपनी कोई जमीन नहीं खोई है। सीमा पर मौजूद भारतीय चौकियां देश के नियंत्रण में हैं और भारतीय सेना तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान निर्धारित क्षेत्रों में तैनात हैं।
यह विवाद पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की चार सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया। पूर्व मंत्री काहफा बेंगिया के नेतृत्व वाली समिति ने 10 जुलाई को ताकसिंग, माजा और गालेमो सहित सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया था। समिति की ओर से दावा किया गया कि ताकसिंग सेक्टर में चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ी हैं और भारतीय सुरक्षा बलों को कुछ गश्ती बिंदुओं तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2023 में हुए कथित टकराव के बाद भारतीय सुरक्षा बल 'शेरा-5' जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं से पीछे हटे और इसके बाद चीनी सैनिकों ने कुछ पारंपरिक रास्तों पर अपनी मौजूदगी मजबूत कर ली। भारतीय सेना के सूत्रों ने इस दावे को भी खारिज किया है। सेना का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC को लेकर दोनों देशों की धारणा कई स्थानों पर अलग-अलग है। इसी वजह से कभी-कभी दोनों देशों के गश्ती दल आमने-सामने आ जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों को स्थापित सैन्य प्रोटोकॉल और निर्धारित प्रक्रियाओं के जरिए संभाला जाता है।
PPA की रिपोर्ट में स्थानीय नाह और मारा समुदाय से जुड़े पारंपरिक शिकार तथा पशु चराई वाले क्षेत्रों का मुद्दा भी उठाया गया। इसमें दावा किया गया कि नंगा पहाड़ जैसे कुछ इलाकों में चीनी सेना की मौजूदगी के कारण स्थानीय लोगों की पहुंच प्रभावित हुई है। सेना के सूत्रों ने ऐसे दावों को आधारहीन बताते हुए कहा कि भारतीय क्षेत्र पर चीन के नए कब्जे जैसी कोई स्थिति नहीं है।
सीमा विवाद के ऐतिहासिक पहलुओं को लेकर भी सेना की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी सीमा को लेकर विवाद दशकों पुराना है। 1959 में लोंगजू क्षेत्र में चीनी सेना और असम राइफल्स के बीच संघर्ष हुआ था। इसके बाद 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीनी सेना कामेंग, सुबनसिरी, सियांग और लोहित घाटियों के कई हिस्सों में आगे बढ़ी थी। युद्धविराम के बाद चीनी सैनिक पीछे हट गए थे।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन लगातार अपना दावा करता रहा है और इसे 'जांगनान' या कथित 'दक्षिण तिब्बत' बताता है। भारत ने चीन के इस दावे को बार-बार सिरे से खारिज किया है। भारत सरकार का स्पष्ट रुख रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस वास्तविकता को चीन द्वारा अलग-अलग नाम देने या बयान जारी करने से नहीं बदला जा सकता।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Pema Khandu ने भी राज्य में किसी नए चीनी अतिक्रमण के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय सुरक्षा बल सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और लोगों को इस तरह की खबरों से घबराने की जरूरत नहीं है।
सीमावर्ती इलाकों में भारत पिछले कुछ वर्षों से सड़क, पुल, संचार नेटवर्क और अन्य रणनीतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों की प्रशासनिक और भौगोलिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की कोशिश सीमावर्ती गांवों में कनेक्टिविटी और नागरिक सुविधाओं को बेहतर करने की भी रही है।
फिलहाल भारतीय सेना की ओर से सामने आई स्थिति के मुताबिक ताकसिंग सेक्टर में भारत की कोई नई जमीन चीन के कब्जे में जाने की बात सही नहीं है। सेना का कहना है कि सीमा की निगरानी लगातार की जा रही है और सुरक्षा बल अपनी जिम्मेदारी के क्षेत्रों में मुस्तैदी से तैनात हैं। वहीं LAC की अलग-अलग धारणाओं के कारण होने वाली आमने-सामने की स्थितियों को स्थापित प्रोटोकॉल के तहत संभाला जाता है।
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