अरुणाचल प्रदेश

भारत सरकार का बड़ा कदम अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को मिली आधिकारिक मान्यता

Ratna Netam
7 Aug 2026 9:29 PM IST
भारत सरकार का बड़ा कदम अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को मिली आधिकारिक मान्यता
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ईटानगर : भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और रणनीतिक कदम उठाते हुए राज्य की 27 भौगोलिक जगहों को आधिकारिक पहचान प्रदान की है। इन स्थानों को अब सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र में शामिल कर लिया गया है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य इन क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान स्थापित करना, स्थानीय भौगोलिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के दावे को और मजबूत करना है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों के नाम बदलने और उन्हें अपने नक्शों में दर्शाने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में इसे भारत की ओर से एक स्पष्ट और रणनीतिक जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है।
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, जिन 27 स्थानों को आधिकारिक मानचित्र में शामिल किया गया है, उनमें सीमावर्ती गांव, पर्वतीय क्षेत्र, दर्रे, स्मारक और झीलें शामिल हैं। लंबे समय से स्थानीय स्तर पर पहचाने जाने वाले इन क्षेत्रों को अब राष्ट्रीय अभिलेखों में भी औपचारिक स्थान मिल गया है। इससे प्रशासनिक रिकॉर्ड मजबूत होंगे, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा होगी और इन क्षेत्रों की भौगोलिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
आधिकारिक सूची में लोंगजू, माजा, बीसा, बड़ा कुंदुम, छोटा कुंदुम, धान बाड़ी, प्रीतानगर, बुद्धामंदिर, जयरामपुर, तेरितनगर, रामनगर, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैशाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कमलेश नगर जैसे जमीनी क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा शेर-ए-थापा मेमोरियल को स्मारक श्रेणी में तथा संभो सरोवर को झील के रूप में आधिकारिक पहचान दी गई है। वहीं, जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और ठग ला जैसे महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रों को भी आधिकारिक नक्शे में दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की उपस्थिति और संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पिछले कुछ वर्षों में चीन कई बार अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नए नाम जारी करता रहा है, जिसे भारत लगातार खारिज करता आया है। भारत का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा किसी भी प्रकार के नाम परिवर्तन से इस तथ्य में कोई बदलाव नहीं आता।
इसी बीच अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्य के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तकसिंग क्षेत्र में कथित चीनी घुसपैठ की खबरों पर भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी दावे पर बिना तथ्यात्मक पुष्टि के विश्वास नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए भारतीय सेना और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने कहा कि नाह वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की जाएगी और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही कोई आधिकारिक निष्कर्ष निकाला जाएगा।
पेमा खांडू ने भारतीय सेना पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा पूरी तरह सक्षम हाथों में है और सुरक्षा बल अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभा रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर भ्रम फैलाने से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
दरअसल, स्थानीय संगठन नाह वेलफेयर सोसाइटी ने दावा किया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास तकसिंग क्षेत्र के याजा और टोगो गांवों के आसपास 15 से 16 किलोमीटर तक अंदर आ गए थे। संगठन के अध्यक्ष केरू चाडर ने आरोप लगाया कि चीनी सैनिक ओलो जलधारा के रास्ते गांवों के काफी करीब तक पहुंच गए थे। हालांकि, इन दावों की अब तक भारतीय सेना या केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इससे पहले जून महीने में भी नाह वेलफेयर सोसाइटी ने ऊपरी सुबनसिरी जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया था कि पीएलए ने असाफिला क्षेत्र के ओयिंग, पनियार, मारपन, पोर्ट्रांग और टिंगडिंगटांग जैसे रणनीतिक इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। संगठन ने वहां सैन्य ढांचा विकसित किए जाने का भी दावा किया था। हालांकि भारतीय सेना ने इन आरोपों को तथ्यों से परे बताते हुए स्पष्ट किया था कि किसी नई घुसपैठ के प्रमाण नहीं मिले हैं।
अरुणाचल प्रदेश सरकार ने भी दोहराया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। ऐसे समय में जब सीमा से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं, भारत द्वारा 27 स्थानों को आधिकारिक मानचित्र में शामिल किया जाना केवल प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि सीमाई क्षेत्रों में अपनी संप्रभुता और दावेदारी को और अधिक मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
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