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अरुणाचल प्रदेश
ईडी ने फर्जी आईटीसी धोखाधड़ी मामले में 10 स्थानों पर की छापेमारी, 658 करोड़ की फर्जी बिलिंग का खुलासा
SHIDDHANT
22 Jan 2026 9:08 PM IST

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Itanagar ईटानगर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), ईटानगर जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी मामले में एक बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल, मणिपुर और झारखंड में कुल 10 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई लगभग 658 करोड़ रुपए की फर्जी बिलिंग और इससे जुड़े 99 करोड़ रुपए के फर्जी आईटीसी क्लेम से संबंधित है, जो सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचा रहा था। ईडी की जांच सीजीएसटी और सेंट्रल एक्साइज, ईटानगर कमिश्नरेट द्वारा 3 अक्टूबर 2024 को दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें सिद्धि विनायक ट्रेड मर्चेंट, अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ शिकायत की गई थी। जांच में पाया गया कि यह फर्म अपने घोषित पते पर अस्तित्व में ही नहीं थी।
अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 (केवल 6 महीनों) में इसने 11 अलग-अलग राज्यों में पंजीकृत 58 प्राप्तकर्ता संस्थाओं को कुल 658.55 करोड़ रुपए मूल्य के 15,258 फर्जी/नकली चालान जारी किए। इन फर्जी चालानों के आधार पर उक्त 58 संस्थाओं ने वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 99.31 करोड़ रुपए का फर्जी आईटीसी गलत तरीके से प्राप्त किया। तलाशी के दौरान कई शेल कंपनियों का खुलासा हुआ, जिनका मुख्य कार्य केवल फर्जी बिल बनाना और आईटीसी पास करना था। कोलकाता स्थित दयाल कमर्शियल, एपी एंटरप्राइजेज, फीनिक्स हाइड्रोलिक्स, राम अवतार बंसल एंड कंपनी और भीमा शंकर इंडस्ट्रीज जैसी फर्मों ने कुल 450 करोड़ रुपए के फर्जी बिल जारी किए। इनमें वाहन निर्माण और बिक्री के झूठे रिकॉर्ड बनाकर फर्जी आईटीसी क्लेम किए गए और जीएसटी रिफंड धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया। यह रकम प्रमोटरों, आपूर्तिकर्ताओं और पेशेवर सुविधादाताओं के बीच बांटी गई, जिसमें फर्जी ई-वे बिल जारी करना और अधिकारियों को रिश्वत देना भी शामिल था।
मणिपुर में फेमा मार्केटिंग का मुख्य स्थान निर्माणाधीन पाया गया, जहां कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो रही थी। फिर भी जीएसटी पोर्टल पर इसे व्यवसाय स्थान दिखाकर पिछले तीन वर्षों से काम करने का दावा किया गया। इसने 100 करोड़ रुपए का काल्पनिक टर्नओवर घोषित किया और 6.05 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया, साथ ही बड़ी कंपनियों को फर्जी आईटीसी पास किया। झारखंड में महेश प्रसाद गुप्ता ने स्वीकार किया कि उसने फर्जी आईटीसी लिया था, लेकिन संबंधित इनवॉइस, ई-वे बिल या लॉरी रसीद नहीं दे पाई। ज्यादातर ऐसी कंपनियां केवल 6-8 महीने सक्रिय रहती थीं, फर्जी इनवॉइस जारी कर आईटीसी बनाती थीं और फिर सीजीएसटी द्वारा उनके जीएसटीएन कैंसिल कर दिए जाते थे। लेकिन तब तक आईटीसी सर्कुलेट हो चुका होता था, जिसका इस्तेमाल कुछ असली कंपनियां करती थीं। तलाशी में बैंक खातों के बैलेंस फ्रीज किए गए, अचल संपत्ति दस्तावेज जब्त हुए, और फर्जी इनवॉइस, ई-वे बिल और लेयर्ड फंड ट्रांसफर के रिकॉर्ड बरामद हुए। एसके कंस्ट्रक्शन के खाते में पड़े 21 लाख रुपए भी फ्रीज कर दिए गए। मुख्य लोगों के बयान रिकॉर्ड किए गए, जिनमें उन्होंने कोई वास्तविक बिजनेस न करने की बात मानी।
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