अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल के 27 स्थानों के नाम पर बौखलाया चीन

Gulabi Jagat
10 Aug 2026 7:33 AM IST
अरुणाचल के 27 स्थानों के नाम पर बौखलाया चीन
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Arunachal: अरुणाचल प्रदेश में 27 स्थानों को मानक नामों से चिह्नित करने के भारत के कदम पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। भारत के इस फैसले को लेकर चीन की ओर से नाराजगी सामने आई है। चीन ने इस कदम को दोनों देशों के बीच हाल के समय में सुधर रहे संबंधों के लिए प्रतिकूल बताया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के विशेषज्ञों ने भारत की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को मानक नाम दिए जाने के फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इस तरह के कदम से सीमा विवाद को सुलझाने की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है। चीन की ओर से यह भी कहा गया है कि नाम बदलने या मानक नाम जारी करने जैसी कार्रवाई से सीमा से जुड़े मतभेदों पर दोनों देशों के बीच बातचीत प्रभावित हो सकती है।

भारत के फैसले से तिलमिला गया चीन
चीन सरकार के अघोषित मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने लेख लिखकर भारत के खिलाफ आग उगली है. त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रेटजी इंस्टीट्यूट के अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग के हवाले से 'ग्लोबल टाइम्स' ने लिखा कि ऐसे समय में जब चीन-भारत संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, तब भारत की ओर से सीमा स्थिति को बढ़ाने वाली कोई भी एकतरफा कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं है.
कियान ने कहा कि यह कार्रवाई द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक हितों की रक्षा नहीं करती. इशारों मे भारत को धमकी देते हुए कियान ने कहा कि भारत को सीमा मुद्दे को बड़े विवाद में बदलने से बचना चाहिए. ऐसी हरकतें दोनों देशों के बीच सुधरते राजनीतिक संबंधों को बाधित कर सकती हैं.
'यह कदम बातचीत के माहौल को नुकसान पहुंचाएगी'
लेख में शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गुओ शुएतांग का बयान भी छापा गया है. गुओ के मुताबिक, भारत की ओर से 27 स्थानों का नामकरण एकतरफा प्रशासनिक कदम है और यह इस क्षेत्र की कानूनी स्थिति को नहीं बदलता है.
अपनी बौखलाहट जाहिर करते हुए गुओ ने कहा कि भारत का यह कदम क्षेत्र पर अपने नियंत्रण के दावे को मजबूत करने और भविष्य की सीमा वार्ताओं में अतिरिक्त दबाव बनाने का एक प्रयास है. हालांकि, ऐसी कार्रवाइयों का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं है और यह केवल दोनों देशों के बीच बातचीत के माहौल को नुकसान पहुंचाएगी.
'प्राचीन काल से चीन का क्षेत्र रहा है जांगनान'
गुओ ने पुरानी चीनी रट लगाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से ज़ांगनान क्षेत्र तिब्बत (शिज़ांग) से जुड़ा रहा है. बताते चलें कि चीन जानबूझकर तिब्बत को शिजांग और अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहकर पुकारता है.
गुओ ने कहा कि जांगनान क्षेत्र पर चीन का रुख हमेशा से एक समान रहा है. यह क्षेत्र निंगची और शन्नान के हिस्सों को कवर करता है और दक्षिण-पश्चिम चीन के तिब्बत क्षेत्र में स्थित है, जो प्राचीन काल से चीन का क्षेत्र रहा है.
चीन अब तक 112 स्थानों के नाम बदल चुका
बताते चलें कि वर्ष 2017 से चीन सुनियोजित साजिश के तहत अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को मंडारिन भाषा में नए नाम देता आ रहा है. अप्रैल 2026 तक वह ऐसे 112 स्थानों के नामों की घोषणा कर चुका है. इनमें गांव, पहाड़ी दर्रे, नदियां और चोटियां शामिल हैं. इनके साथ मानक चीनी और तिब्बती नाम दिए गए हैं. साथ ही, भौगोलिक निर्देशांक दिए गए हैं.
इसके पीछे चीन की साजिश ये है कि धीरे-धीरे दुनियाभर की मीडिया में उसके ये नाम सामान्य रूप से इस्तेमाल होने लगे हैं. ऐसा होने पर उसका ये दावा पुख्ता होने लगेगा कि चूंकि उसके दिए चीनी नामों को अब दुनिया भी मानने लगी है. इसलिए वे क्षेत्र उसके हैं. लेकिन अब भारत ने चीन का यह दांव उसी पर इस्तेमाल कर दिया है. जिसके बाद से चीन सरकार समेत उसके तमाम विशेषज्ञ बुरी तरह बौखला गए हैं.
भारत के धोबीपाट से फेल हो गया सारा नैरेटिव
उन्हें उम्मीद नहीं थी कि भारत इस तरह एक ही बार 'धोबीपाट' करके उसके सारे नैरेटिव की धज्जियां उड़ा सकता है. यही वजह है कि भारत की ओर से अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम मानकीकृत किए जाने के बाद वहां के सारे एक्सपर्ट बौखलाए घूम रहे हैं. इसकी वजह ये है कि इंटरनेशनल मीडिया में अब उसके नहीं बल्कि भारत के दिए नामों का ही इस्तेमाल होगा. जिसके चलते अरुणाचल प्रदेश पर उसके सारे दावों की हवा निकल जानी है.
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