आंध्र प्रदेश

मुरासु तूफान से राहत की खबर, आंध्र प्रदेश में मौसम सुधरा

Ratna Netam
5 Nov 2026 2:59 PM IST
मुरासु तूफान से राहत की खबर, आंध्र प्रदेश में मौसम सुधरा
x
अमरावती। आंध्र प्रदेश में चक्रवात मुरासु (Cyclone Murasu) का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा है। पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरों के कारण प्रभावित तटीय इलाकों में मौसम की स्थिति सुधर रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तीन नवंबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने वाला चक्रवात मुरासु कमजोर होकर चार नवंबर को डिप्रेशन यानी अवदाब में बदल गया। इसके बाद तूफान की तीव्रता में लगातार कमी दर्ज की गई है। हालांकि, मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि चक्रवात कमजोर होने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।चक्रवात मुरासु ने तीन नवंबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में ओंगोल के आसपास तट को पार किया था। उस समय तूफान के साथ लगभग 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं। कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई गई थी। चक्रवात के कारण तटीय इलाकों में भारी बारिश हुई और समुद्र की स्थिति काफी खराब हो गई थी।
मौसम विभाग के अनुसार, तट से टकराने के बाद चक्रवात धीरे-धीरे कमजोर होने लगा। चार नवंबर की सुबह तक इसका प्रभाव पूर्वी तेलंगाना और उससे सटे तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में अवदाब के रूप में बना हुआ था। मौसम वैज्ञानिकों ने इसके आगे और कमजोर होकर कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई थी।चक्रवात के कमजोर पड़ने से आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में राहत की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, राज्य के कई इलाकों में बारिश का असर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने पांच नवंबर को भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।चक्रवात मुरासु के दौरान राज्य सरकार ने संभावित नुकसान को कम करने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास किए गए थे। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, तूफान के तट से टकराने से पहले लगभग दो हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने भी प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों के लिए अपनी टीमें तैनात की थीं। तीन नवंबर को एनडीआरएफ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उस समय तक चक्रवात मुरासु के कारण राज्य में किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं मिली थी। यह जानकारी शुरुआती स्थिति से संबंधित थी और इसे अंतिम नुकसान के आकलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।तूफान के दौरान भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ था। कई इलाकों में लोगों को अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई थी। सुरक्षा के मद्देनजर कुछ परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा। तीन नवंबर को विजयवाड़ा से जुड़ी आठ इंडिगो उड़ानें रद्द किए जाने की खबर सामने आई थी।तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की चेतावनी जारी की गई थी। मौसम विभाग ने बताया था कि चक्रवात के कारण समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं और तेज हवाएं समुद्री गतिविधियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। इसी वजह से मछली पकड़ने वाली नौकाओं और अन्य छोटे समुद्री जहाजों के संचालन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी।
मौसम विभाग ने चार नवंबर तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और आंध्र प्रदेश के तटीय समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को सतर्क रहने को कहा था। अब चक्रवात की तीव्रता कम होने के साथ समुद्री परिस्थितियों में भी धीरे-धीरे सुधार की संभावना है। हालांकि, मछुआरों को समुद्र में जाने से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की नवीनतम चेतावनी का पालन करना चाहिए।मुरासु का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। इसके कारण तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिलीं। मौसम विभाग ने चक्रवात के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में वर्षा और गरज-चमक की संभावना व्यक्त की थी।छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में भी तीन और चार नवंबर को बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। हालांकि, मौसम संबंधी पूर्वानुमान के अनुसार पांच और छह नवंबर को प्रदेश के लिए चक्रवात से संबंधित कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई थी।
आंध्र प्रदेश में चक्रवात के बाद अब प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने की चुनौती है। जिन इलाकों में भारी बारिश हुई है, वहां जलभराव, सड़क संपर्क और बिजली आपूर्ति जैसी व्यवस्थाओं की स्थिति का आकलन महत्वपूर्ण होगा। इसके अतिरिक्त किसानों की फसलों और अन्य संपत्तियों को हुए संभावित नुकसान की जानकारी जुटाना भी आवश्यक है।विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी चक्रवात के कमजोर पड़ने के बाद भी उसके अवशेषों से बारिश हो सकती है। इसलिए केवल हवा की रफ्तार कम होने को खतरा पूरी तरह समाप्त होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर अचानक तेज बारिश जैसी परिस्थितियों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।फिलहाल चक्रवात मुरासु के कमजोर होने से आंध्र प्रदेश को बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता में और कमी आने की संभावना है। राज्य में मौसम सामान्य होने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में दैनिक गतिविधियों के सुचारु होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रशासन और नागरिकों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
Next Story