आंध्र प्रदेश

भविष्य के युद्ध AI से लड़े जाएंगे, लेकिन जीत के लिए मजबूत सैन्य शक्ति जरूरी: Rajnath Singh

Kavita2
11 July 2026 12:56 PM IST
भविष्य के युद्ध AI से लड़े जाएंगे, लेकिन जीत के लिए मजबूत सैन्य शक्ति जरूरी: Rajnath Singh
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विशाखापत्तनम : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल सकती है और भविष्य के संघर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों की अहम भूमिका होगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध केवल तकनीक के दम पर नहीं जीते जा सकते, बल्कि इसके लिए देश का मजबूत संकल्प, प्रशिक्षित सैनिक और सक्षम सैन्य शक्ति सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे।

रक्षा मंत्री ने यह बात INA महेंद्रगिरी की कमीशनिंग सेरेमनी के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धों में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसी भी देश की असली ताकत उसकी सैन्य क्षमता और सैनिकों की तैयारी होती है।

AI के साथ सैन्य तैयारी पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर तकनीक और अन्य आधुनिक प्रणालियों के माध्यम से लड़े जा सकते हैं। लेकिन जीत हासिल करने के लिए केवल तकनीकी क्षमता पर्याप्त नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि युद्ध में सफलता के लिए देश का दृढ़ संकल्प, प्रशिक्षित और अनुशासित सैनिक तथा मजबूत सैन्य ढांचा जरूरी है।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है और बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए नई तकनीकों को अपनाने पर ध्यान दे रहा है।

INA महेंद्रगिरी की कमीशनिंग

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण युद्धपोत INA महेंद्रगिरी की कमीशनिंग सेरेमनी में हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा कि यह युद्धपोत भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रतीक है। आधुनिक तकनीक से लैस यह पोत नौसेना की ताकत को और बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयात करने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आंध्र प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बन रहा

राजनाथ सिंह ने कहा कि आंध्र प्रदेश भारत के डिफेंस और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के नए पावरहाउस के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य में मौजूद औद्योगिक क्षमता, कुशल मानव संसाधन और बेहतर बुनियादी ढांचा रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र पर सरकार का फोकस

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत देश में ही अत्याधुनिक हथियारों, सैन्य उपकरणों और युद्धपोतों का निर्माण किया जा रहा है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय कंपनियां और रक्षा संस्थान नई तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सैनिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सैनिकों की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चाहे तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, लेकिन युद्ध के मैदान में सैनिकों का साहस, प्रशिक्षण और समर्पण ही निर्णायक साबित होता है।

उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य परंपरा हमेशा से वीरता और कर्तव्य भावना के लिए जानी जाती रही है।

बदलती सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार भारत

राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में देशों के सामने नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो रही हैं। ऐसे समय में भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाएं नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ अपनी पारंपरिक क्षमताओं को भी मजबूत कर रही हैं।

INA महेंद्रगिरी की कमीशनिंग को भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया। रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनेगा और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

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