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Andhra: स्वर्ण ग्रामम, स्वर्ण वार्ड के कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने कदम उठाए

अमरावती: सोशल वेलफेयर मिनिस्टर डोला बाला श्री वीरंजनेय स्वामी ने बताया कि राज्य सरकार ने 'स्वर्ण ग्रामम' और 'स्वर्ण वार्ड' कर्मचारियों की सर्विस से जुड़ी समस्याओं—जैसे प्रमोशन, करियर में तरक्की, छुट्टी, वेतन वृद्धि और मृत्यु पर मिलने वाले लाभ—को हल करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
सोमवार को सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सभी जायज और व्यावहारिक मांगों पर विचार करने के लिए तैयार है। कर्मचारियों की समस्याओं की जांच करने और सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए डिप्टी चीफ मिनिस्टर के. पवन कल्याण की अध्यक्षता में एक कैबिनेट सब-कमेटी बनाई गई है।
सरकार पहले ही 18 कैडर में 14,331 कर्मचारियों का प्रमोशन कर चुकी है, जबकि म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने 800 और कर्मचारियों के प्रमोशन का आदेश दिया है। इंजीनियरिंग असिस्टेंट और वेलफेयर असिस्टेंट के लिए प्रमोशन गाइडलाइंस को अंतिम रूप दिया जा रहा है और वे तीन हफ़्ते में तैयार हो जाएंगी।
मंत्री ने उन लगभग 2,000 कर्मचारियों की आलोचना की जिन्होंने रविवार को विजयवाड़ा में बिना सरकारी अनुमति के विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत पर दुख जताया और घटना के बारे में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों की निंदा की। उन्होंने कहा कि सरकार पिछली भर्ती प्रक्रिया से चली आ रही सर्विस-नियमों की कमियों को ठीक कर रही है।
मंत्री वीरंजनेय स्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि GO Ms No 11 के तहत कर्मचारियों को प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार सौंपे गए कर्तव्यों का पालन करना होता है और इसका मकसद उन पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं था।
IT और स्वर्ण ग्रामम/स्वर्ण वार्ड डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी कटमनेनी भास्कर ने बताया कि 2019-20 में लगभग 1.23 लाख कर्मचारियों को 15,000 रुपये के एकमुश्त वेतन पर भर्ती किया गया था। प्रोबेशन के बाद, योग्य कर्मचारियों को रेगुलर पे-स्केल के दायरे में लाया गया।
सरकार ने 'ऑटोमैटिक एडवांसमेंट स्कीम' का लाभ उन लगभग 1.14 लाख योग्य कर्मचारियों तक बढ़ाया है, जिन्होंने एक ही पद पर छह साल पूरे कर लिए हैं। 21 सितंबर को GO No 7 जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि इस फैसले से 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
ऑटोमैटिक कैजुअल लीव की सुविधा भी शुरू की गई है। अगर सक्षम अधिकारी 24 घंटे के भीतर कोई कार्रवाई नहीं करता है, तो छुट्टी को मंजूर माना जाएगा। कर्मचारी 'अर्न्ड लीव' (अर्जित अवकाश) और अन्य योग्य लाभ पाने के हकदार हैं। काम के दबाव से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए ज़िला-स्तरीय कमेटियों और हर महीने शिकायत सेल बनाने का आदेश दिया गया है। साथ ही, तय छुट्टी के दौरान कर्मचारियों को कोई काम नहीं सौंपा जाना चाहिए, सिवाय इमरजेंसी के।
सेक्रेटरी भास्कर ने बताया कि पात्र परिवारों को तीन महीने के अंदर डेथ बेनिफिट (मृत्यु पर मिलने वाला लाभ) मिल जाएगा और 121 लोगों को पहले ही दया के आधार पर नौकरी दी जा चुकी है। स्टाइपेंड की अवधि के लिए नोशनल इंक्रीमेंट (काल्पनिक वेतन वृद्धि) के प्रस्ताव फाइनेंस डिपार्टमेंट को भेजे जा रहे हैं।
जूनियर असिस्टेंट कैडर की मांग पर भास्कर ने कहा कि कर्मचारियों की नियुक्ति मूल रूप से रिकॉर्ड असिस्टेंट के तौर पर हुई थी और मौजूदा नियमों के तहत ऐसे अपग्रेड का कोई प्रावधान नहीं है; साथ ही, इससे 20 कैडर के कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं।





