आंध्र प्रदेश

आंध्र CID ने क्रिप्टो ठगी का किया खुलासा

Kiran
5 Nov 2026 8:21 AM IST
आंध्र CID ने क्रिप्टो ठगी का किया खुलासा
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अमरावती: आंध्र प्रदेश अपराध जांच विभाग (CID) ने लगभग 1.5 मिलियन डॉलर (करीब 15 करोड़ रुपये) से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी निवेश घोटाले का पर्दाफाश किया है। CID ने अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स के जरिए रकम का पता लगाया और पीड़ित को उसकी ठगी गई संपत्ति वापस दिलाने के लिए अदालत से आदेश प्राप्त किया।
CID की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तेनाली के एक पीड़ित को अधिक रिटर्न का लालच देकर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए फुसलाया गया और उससे 15 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस मामले में मंगलगीरी स्थित CID पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। जांच में एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का पता चला, जिसने फंड के स्रोत और उसके आवागमन को छिपाने के लिए कई क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया।
जांचकर्ताओं ने पाया कि पीड़ित ने शुरुआत में अपने बैंक खातों से 13 नॉन-कस्टोडियल क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में फंड ट्रांसफर किया, जिनमें रॉबिनहुड (Robinhood) का एक वॉलेट और 12 ऑन-चेन वॉलेट शामिल थे। आरोपियों के बहकावे में आकर, उसने बाद में इन क्रिप्टोकरेंसी को 'हनीकॉम्बएपीआई.ओआरजी' (Honeycombapi.org) और 'अलीबारबिट.बिट' (Alibarbit.bit) जैसे फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म्स पर ट्रांसफर कर दिया, यह मानते हुए कि ये निवेश असली हैं।
इन फर्जी प्लेटफॉर्म्स पर बिटकॉइन, सोलाना और डॉजकॉइन से जुड़े कुल 27 क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन किए गए, जिनकी कीमत लगभग 1.5 मिलियन डॉलर थी। CID ने बताया कि इसके बाद फंड को कई चरणों (लेयरिंग) और कई 'म्यूल' खातों (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) के जरिए घुमाया गया, और अंत में यह केमैन आइलैंड्स स्थित क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 'गेट ग्लोबल कॉरपोरेशन' (Gate Global Corporation) तक पहुंच गया। ब्लॉकचेन ट्रांजैक्शन के विस्तृत विश्लेषण, तकनीकी जांच और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के जरिए, CID ने ठगी गई क्रिप्टोकरेंसी के आवागमन का पता लगाया और आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों की पहचान की।
खास तौर पर, 15 बिटकॉइन ट्रांजैक्शन का पता चला, जो इस संगठित अपराध गिरोह से जुड़े 'गेट.आईओ' (Gate.io) एक्सचेंज के चार खातों में गए थे। न्यायिक प्रक्रिया के जरिए इन पहचानी गई संपत्तियों को फ्रीज (जब्त) कर दिया गया। यह जांच गृह मंत्रालय के तहत 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) की तकनीकी सहायता और समन्वय से की गई। CID ने इस संगठित साइबर अपराध गिरोह से जुड़े आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से दो हैदराबाद के, दो महाराष्ट्र के, एक मलेशिया का, दो चीन के और एक पुर्तगाल का रहने वाला है। इस गिरोह के खिलाफ सक्षम अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है। CID के अनुसार, गुंटूर की एक अदालत ने 'गेट ग्लोबल कॉर्प' (Gate Global Corp.) को निर्देश दिया कि वह चार चिह्नित खातों में मौजूद क्रिप्टोकरेंसी एसेट्स को मौजूदा बाजार मूल्य पर USDT में बदल दे और पूरी राशि पीड़ित के क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में ट्रांसफर कर दे। CID ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। यह जटिल अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी की जांच, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्मों पर अपराध से प्राप्त रकम का पता लगाने और पीड़ित की संपत्ति वापस दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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