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Yoga : 30 के बाद हर पुरुष और महिला को शुरू कर देने चाहिए ये योगासन
Sarita
14 Jun 2025 12:09 PM IST

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Yoga : 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को हार्मोन संतुलन बिगड़ने लगता है, जिसे योग स्वाभाविक रूप से संतुलित करता है। वहीं योगासनों से पीरियड्स की अनियमितता, पीसीओडी और मेनोपॉज से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
अगर पुरुषों के लिए योग के फायदों की बात की जाए तो कुछ आसन पुरुषों में मांसपेशियों की सख्ती, पेट की चर्बी और तनाव को नियंत्रित करने में अत्यंत सहायक होते हैं। साथ ही पुरुष द्वारा योगाभ्यास से ध्यान के साथ करने से मानसिक एकाग्रता और फोकस बढ़ता है।यहां कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बताया जा रहा है जो 30 की आयु के बाद महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए बेहद लाभदायक हैं।
ताड़ासन:
ताड़ासन को अंग्रेजी में Mountain Pose कहते हैं। इस आसन का अभ्यास प्रतिदिन 30 सेकंड से एक मिनट तक किया जा सकता है। इसके लिए सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को ऊपर उठाएं। शरीर का भार पंजों पर उठाएं और लंबी सांस लें। ताड़ासन रीढ़ की हड्डी को सीधा रखता है। पोस्चर में सुधार के साथ संतुलन विकसित करता है। यह आसन महिला और पुरुष दोनों के स्वास्थ्य के लिए असरदार है।
भुजंगासन:
भुजंगासन को सर्पासन भी कहते हैं। इस आसन के अभ्यास से पीठ के निचले हिस्से को मजबूती मिलती है और रीढ़ को लचीला आता है। महिलाओं के लिए यह आसन हार्मोन बैलेंस में मददगार है। इस आसन में शरीर की मुद्रा सांप जैसी हो जाती है। इस आसन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर हाथों के सहारे शरीर को ऊपर उठाएं।
वज्रासन :
वज्रासन के नियमित अभ्यास से पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। इस आसन को करने से पाचन में सुधार होता है। तनाव कम होता और घुटनों व एड़ियों में मजबूती आती है। रोजाना पांच से 10 मिनट वज्रासन की मुद्रा में बैठ सकते हैं। खाने के बाद इस आसन का अभ्यास करना लाभकारी हो सकता है।
सेतुबंधासन:
सेतुबंधासन के अभ्यास के दौरान शरीर की मुद्रा एक पुल की तरह होती है। इसमें पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़े और कमर को ऊपर उठाएं। इस आसन के अभ्यास से हार्मोनल संतुलन, थायरॉइड ग्रंथि सक्रिय और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती है। महिलाएं सेतुबंधासन का नियमित अभ्यास करके पीसीओएस और पीसीओडी की समस्या से दूर रह सकती हैं। सेतुबंधासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और कमर को ऊपर उठाएं।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन :
कमर दर्द में राहत, पाचन में सुधार और रीढ़ की नसों को शक्ति देने के लिए अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। पुरुषों में प्रोस्टेट स्वास्थ्य के लिए यह आसन लाभकारी माना जाता है। इसके अभ्यास के लिए बैठकर पैरों को मोड़ते हुए रीढ़ को ट्विस्ट करें और सांस पर ध्यान दें।
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