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Yoga: योग का नियमित अभ्यास शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और खून से संबंधित लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है। दवाओं और डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ अगर योग को दिनचर्या में शामिल किया जाए तो थैलेसीमिया मरीज भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। आइए जानें थैलेसीमिया में कौन-कौन से योगासनों का अभ्यास लाभकारी माना जाता है।
कपालभाति प्राणायाम:
कपालभाति प्राणायाम के नियमित अभ्यास से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनता है। यह शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाता है जिससे कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं। यह मानसिक तनाव कम करने के साथ शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखता है। प्राणायाम करने से बेहतर ऑक्सीजन आपूर्ति के कारण शरीर के अंगों का पोषण अच्छा होता है, जिससे खून की कमी से होने वाली थकान और कमजोरी कम होती है।
वज्रासन :
इस आसन के नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया मजबूत होती है। यह आसान शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है, जिससे एनीमिया के लक्षण कम होते हैं।
भुजंगासन का अभ्यास रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। साथ ही खून का संचार बेहतर करता है। पेट से संबंधित समस्याओं को कम करता है। पाचन बेहतर होने से रक्त निर्माण में सहायता मिलती है।
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