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लाइफ स्टाइल
Airport पर लैपटॉप बैग से निकालने की असली वजह क्या है? जानिए अंदर की पूरी कहानी
Harrison
21 Oct 2025 8:38 PM IST

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Lifestyle, लाइफस्टाइल : अगर आप हवाई यात्रा करते हैं, तो आपने जरूर देखा या अनुभव किया होगा कि सिक्योरिटी चेक के दौरान आपसे कहा जाता है कि अपने लैपटॉप को बैग से बाहर निकालकर ट्रे में अलग से रखें। यह एक आम प्रक्रिया बन चुकी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की असली वजह क्या है? आज हम आपको बताने जा रहे हैं वो अंदर की बात, जो ज्यादातर यात्रियों को नहीं पता होती।
तो आखिर क्यों कहा जाता है लैपटॉप निकालने को?
सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान हर बैग को स्कैन किया जाता है। इसके लिए एक्स-रे मशीन का इस्तेमाल होता है, जो बैग के अंदर रखी वस्तुओं की छवि (image) बनाकर सुरक्षा कर्मियों को दिखाती है। यह छवि कई परतों वाली होती है, और इसका विश्लेषण करना एक प्रशिक्षित व्यक्ति के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है — खासकर जब बैग के अंदर कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हों।
लैपटॉप जैसे डिवाइस अपेक्षाकृत बड़े और घने (dense) होते हैं। जब इन्हें बैग के अंदर अन्य वस्तुओं के साथ स्कैन किया जाता है, तो वे एक्स-रे इमेज में एक बड़ी ठोस परत की तरह दिखते हैं। इससे यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि लैपटॉप के साथ कोई संदिग्ध वस्तु छिपी है या नहीं।
एक्सपर्ट्स की राय:
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, “लैपटॉप के अंदर बैटरी, प्रोसेसर, वायरिंग और सर्किट बोर्ड जैसी चीजें होती हैं, जो एक्स-रे में किसी विस्फोटक सामग्री जैसी दिखाई दे सकती हैं। अगर ये बैग में बाकी सामान के साथ स्कैन होते हैं, तो एक्स-रे इमेज अस्पष्ट हो सकती है। इससे जांच में देरी होती है और सुरक्षा में चूक की संभावना भी बढ़ जाती है।”
इसीलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि लैपटॉप को बाहर निकालकर अलग ट्रे में रखा जाए ताकि सुरक्षा अधिकारी उसे साफ-साफ स्कैन कर सकें और बिना किसी शक के जांच पूरी हो सके।
क्या सिर्फ लैपटॉप ही बाहर निकालना ज़रूरी होता है?
नहीं, कई बार टैबलेट, कैमरा, पावर बैंक, और अन्य बड़े इलेक्ट्रॉनिक आइटम को भी बाहर निकालने के लिए कहा जाता है। ऐसा तब होता है जब सिक्योरिटी स्टाफ को लगता है कि बैग में मौजूद डिवाइस एक्स-रे इमेज को प्रभावित कर सकते हैं।
नई तकनीकों से क्या मिलेगा समाधान?
हाल के वर्षों में कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर नई 3D CT स्कैन तकनीक (Computed Tomography) को अपनाया गया है, जिसमें बैग को बिना खोले ही उसके अंदर की स्पष्ट 3D छवि मिल जाती है। इन तकनीकों से भविष्य में यात्रियों को लैपटॉप या अन्य गैजेट्स को बैग से निकालने की जरूरत नहीं होगी। भारत में भी धीरे-धीरे इस तकनीक को अपनाया जा रहा है, लेकिन फिलहाल ज़्यादातर एयरपोर्ट्स पर पारंपरिक एक्स-रे सिस्टम ही उपयोग में हैं।
यात्रियों के लिए सुझाव:
सिक्योरिटी चेक से पहले ही अपना लैपटॉप या टैबलेट बैग से निकालकर तैयार रखें।
अलग ट्रे में रखकर समय की बचत करें और लाइन में रुकावट न बनें।
पावर बैंक और अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम भी जांच के लिए तैयार रखें।
एयरपोर्ट निर्देशों और स्टाफ के सुझावों का पालन करें — ये आपकी सुरक्षा के लिए ही है।
लैपटॉप को बैग से निकालने की यह प्रक्रिया यात्रियों के लिए थोड़ी असुविधाजनक जरूर हो सकती है, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह सुरक्षा की गंभीर सोच छिपी है। एक छोटी सी सावधानी, बड़ी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
इसलिए अगली बार जब आपसे कहा जाए कि “लैपटॉप बाहर निकालिए”, तो समझिए कि यह आपके और सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है — और यही अंदर की सबसे बड़ी बात है।
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