लाइफ स्टाइल

एनालॉग पनीर से बचना है? खरीदारी के समय इन बातों का रखें ध्यान

Ratna Netam
6 Aug 2026 6:16 PM IST
एनालॉग पनीर से बचना है? खरीदारी के समय इन बातों का रखें ध्यान
x
लाइफ स्टाइल : देशभर में इन दिनों **एनालॉग पनीर** चर्चा का विषय बना हुआ है। छत्तीसगढ़ में इसके उपयोग और बिक्री को लेकर सख्त कदम उठाए जाने के बाद आम लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर एनालॉग पनीर होता क्या है, क्या यह नकली पनीर है और क्या इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। पनीर भारतीय खानपान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और घरों से लेकर होटल, रेस्तरां और बड़े आयोजनों तक इसकी व्यापक खपत होती है। ऐसे में इस विषय को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एनालॉग पनीर और नकली पनीर एक ही चीज नहीं हैं। यदि एनालॉग पनीर निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार तैयार किया गया है और उसकी पैकेजिंग पर स्पष्ट रूप से इसकी जानकारी दी गई है, तो इसे अवैध या नकली नहीं कहा जा सकता। हालांकि यदि कोई विक्रेता इसे असली दूध से बने पनीर के नाम पर बेचता है, तो यह उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी की श्रेणी में आ सकता है।
सामान्य तौर पर घरों में बनने वाला पारंपरिक पनीर ताजे दूध को फाड़कर तैयार किया जाता है। इसमें दूध मुख्य कच्चा माल होता है और यही कारण है कि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम तथा अन्य पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके विपरीत एनालॉग पनीर बनाने की प्रक्रिया अलग होती है। इसमें दूध के साथ वनस्पति तेल, स्टार्च, मिल्क पाउडर, इमल्सीफायर और अन्य स्वीकृत खाद्य सामग्री का मिश्रण तैयार किया जाता है। बाद में मशीनों की सहायता से इसे पनीर का आकार दिया जाता है, जिससे यह देखने में लगभग असली पनीर जैसा दिखाई देता है।
खाद्य उद्योग में एनालॉग पनीर का उपयोग काफी समय से किया जा रहा है। इसकी लागत पारंपरिक पनीर की तुलना में कम होती है, इसलिए कई होटल, फास्ट फूड आउटलेट और बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करने वाले संस्थान इसका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि इसकी पोषण गुणवत्ता असली पनीर जैसी नहीं होती। कई उत्पादों में वसा और नमक की मात्रा अधिक हो सकती है, जबकि प्रोटीन अपेक्षाकृत कम मिलता है। यही कारण है कि पोषण विशेषज्ञ नियमित सेवन के लिए दूध से बने असली पनीर को बेहतर विकल्प मानते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि एनालॉग पनीर किसी विश्वसनीय कंपनी द्वारा निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है तो इसके सेवन से तत्काल स्वास्थ्य संबंधी नुकसान होने की आशंका नहीं रहती। लेकिन यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि यह पोषण के मामले में असली पनीर का पूरी तरह विकल्प है। जिन लोगों को उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और कैल्शियम चाहिए, उनके लिए पारंपरिक पनीर अधिक लाभदायक माना जाता है।
उपभोक्ता कुछ आसान तरीकों से दोनों के बीच अंतर समझ सकते हैं। यदि पैकेट पर "Analog Paneer", "Vegetable Fat" या "Dairy Whitener Base" जैसे शब्द लिखे हों तो यह दूध से बना पारंपरिक पनीर नहीं है। वहीं असली पनीर के लेबल में मुख्य सामग्री के रूप में दूध का उल्लेख होता है। बनावट में भी अंतर देखा जा सकता है। असली पनीर हल्का दानेदार और मुलायम होता है, जबकि एनालॉग पनीर अक्सर अधिक चिकना, एकसार या रबड़ जैसा महसूस हो सकता है। पकाने के दौरान भी असली पनीर अपनी बनावट बनाए रखता है, जबकि कुछ प्रकार के एनालॉग पनीर अधिक पिघल सकते हैं या चिपचिपे हो सकते हैं।
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय हमेशा उत्पाद का लेबल ध्यान से पढ़ना चाहिए। पैकेज्ड उत्पादों में सामग्री सूची, निर्माण कंपनी और खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लेख देखना जरूरी है। यदि खुला पनीर खरीदा जा रहा है तो विश्वसनीय डेयरी या विक्रेता से ही खरीदना बेहतर माना जाता है।
हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में खाद्य गुणवत्ता को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी उत्पाद को उसकी वास्तविक पहचान छिपाकर न बेचा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूक उपभोक्ता ही अपनी सेहत और खर्च दोनों के लिहाज से सही निर्णय ले सकता है।
कुल मिलाकर एनालॉग पनीर कोई प्रतिबंधित या स्वाभाविक रूप से हानिकारक खाद्य पदार्थ नहीं है, लेकिन इसे असली पनीर का समान विकल्प भी नहीं माना जा सकता। यदि उद्देश्य बेहतर पोषण और उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन प्राप्त करना है, तो दूध से बना पारंपरिक पनीर अधिक उपयुक्त रहेगा। वहीं किसी भी उत्पाद का सेवन करने से पहले उसकी गुणवत्ता, सामग्री और लेबल की जानकारी पढ़ना आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
Next Story