लाइफ स्टाइल

रोशनी और हवा के लिए पुराने घरों में जरूरी था आंगन का डिजाइन

Kanchan Paikara
13 Jun 2026 4:52 PM IST
रोशनी और हवा के लिए पुराने घरों में जरूरी था आंगन का डिजाइन
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अगर हम अपने दादा-दादी या उनसे पहले की पीढ़ी की बात करें

Lifestyle लाइफस्टाइल : पुराने घरों का जिक्र होते ही सबसे पहले जो तस्वीर दिमाग में आती है, वह घर के बीच में बने बड़े आंगन की होती है। भारत में खासकर ग्रामीण और पारंपरिक शहरी घरों में आंगन एक अहम हिस्सा हुआ करता था। दादा-दादी या उससे भी पुरानी पीढ़ियों के घरों में लगभग हर घर में आंगन जरूर होता था, जो परिवार की दिनचर्या और सामाजिक जीवन का केंद्र माना जाता था।

आंगन केवल एक खाली जगह नहीं होता था, बल्कि यह पूरे घर की गतिविधियों का मुख्य स्थान होता था। सुबह की धूप से लेकर शाम की ठंडी हवा तक, आंगन घर के हर सदस्य के लिए एक खुला और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराता था। बच्चों के खेलने से लेकर महिलाओं के घरेलू काम और बुजुर्गों के बैठने तक, हर काम के लिए आंगन का उपयोग किया जाता था।

विशेषज्ञों के अनुसार, आंगन का डिजाइन सिर्फ परंपरा नहीं था, बल्कि इसके पीछे व्यावहारिक और प्राकृतिक कारण भी थे। आंगन घर में रोशनी और हवा के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता था, जिससे घर के अंदर प्राकृतिक वेंटिलेशन बना रहता था। इससे गर्मी के मौसम में घर अपेक्षाकृत ठंडा रहता था और वातावरण अधिक आरामदायक होता था।

इसके अलावा आंगन पारिवारिक और सामाजिक जीवन का भी केंद्र होता था। त्योहारों, शादी-ब्याह और अन्य पारिवारिक आयोजनों में आंगन का विशेष महत्व होता था। पूरा परिवार एक साथ आंगन में इकट्ठा होकर गतिविधियों में भाग लेता था, जिससे आपसी संबंध मजबूत होते थे।

धीरे-धीरे समय के साथ घरों के डिजाइन में बदलाव आने लगा। शहरीकरण, जगह की कमी और आधुनिक अपार्टमेंट संस्कृति के कारण आंगन की जगह बंद संरचनाओं ने ले ली। आज के फ्लैट्स और आधुनिक घरों में आंगन का स्थान बालकनी और लिविंग रूम ने ले लिया है।

वास्तु और परंपरागत वास्तुकला के जानकारों का मानना है कि आंगन केवल एक संरचनात्मक हिस्सा नहीं था, बल्कि यह मानसिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता था। खुले वातावरण में रहने से तनाव कम होता था और परिवार के बीच संवाद बढ़ता था।

आज के समय में भले ही आंगन का चलन कम हो गया हो, लेकिन इसकी उपयोगिता और महत्व को आज भी लोग याद करते हैं। कई लोग अपने आधुनिक घरों में छोटे आंगन या ओपन स्पेस बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि पुराने समय की उस प्राकृतिक और पारिवारिक भावना को फिर से जिया जा सके।

इस प्रकार, आंगन केवल पुराने घरों की पहचान नहीं था, बल्कि यह भारतीय जीवनशैली, संस्कृति और सामाजिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जो समय के साथ भले ही कम हो गया हो, लेकिन उसकी यादें आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।

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