लाइफ स्टाइल

दही खरीदें या घर पर जमाएं जानें सेहत के लिए सही विकल्प

Ratna Netam
3 Oct 2026 5:25 PM IST
दही खरीदें या घर पर जमाएं जानें सेहत के लिए सही विकल्प
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लाइफ स्टाइल : दही भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है। गर्मियों में ठंडी दही हो या खाने के साथ रायता, बहुत से लोग इसे रोजाना अपनी डाइट में शामिल करते हैं। दही में प्रोटीन, कैल्शियम और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि बाजार में मिलने वाली पैकेट वाली दही ज्यादा अच्छी है या घर पर दूध जमाकर बनाई गई दही? दोनों देखने और स्वाद में लगभग एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन इन्हें तैयार करने के तरीके, बैक्टीरिया की किस्मों, सामग्री और स्टोरेज के कारण इनमें कुछ अंतर हो सकते हैं।
सबसे पहले घर की दही की बात करें तो इसे आमतौर पर दूध को गर्म करने और फिर हल्का गुनगुना होने पर थोड़ी पुरानी दही मिलाकर जमाया जाता है। पुरानी दही स्टार्टर कल्चर का काम करती है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूध में मौजूद लैक्टोज को फर्मेंट करते हैं, जिससे दूध गाढ़ा होकर दही में बदल जाता है।
घर की दही का एक फायदा यह है कि इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले दूध पर आपका नियंत्रण रहता है। आप अपनी जरूरत के अनुसार फुल क्रीम, टोंड या कम फैट वाला दूध चुन सकते हैं। इसमें आम तौर पर अलग से चीनी, फ्लेवर या दूसरी सामग्री मिलाने की जरूरत नहीं होती।
वहीं पैकेट वाली दही डेयरी कंपनियां नियंत्रित परिस्थितियों में तैयार करती हैं। इसमें दूध को निर्धारित प्रक्रिया से गुजारने के बाद विशेष स्टार्टर कल्चर का इस्तेमाल किया जाता है। उत्पादन के दौरान तापमान, स्वच्छता और गुणवत्ता को नियंत्रित किया जाता है। पैकिंग के बाद इसे ठंडे तापमान पर रखा जाता है, ताकि इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा निर्धारित अवधि तक बनी रहे।
पोषण के लिहाज से साधारण पैकेट वाली दही और घर की दही दोनों ही उपयोगी हो सकती हैं। दोनों में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व मिलते हैं। हालांकि इनकी वास्तविक मात्रा इस्तेमाल किए गए दूध, फैट की मात्रा और उत्पाद के प्रकार पर निर्भर करती है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर घर की दही हर पैकेट वाली दही से ज्यादा पौष्टिक होती है या इसका उल्टा।
सबसे बड़ा अंतर पैकेट के लेबल से समझा जा सकता है। बाजार में मिलने वाली सभी दही एक जैसी नहीं होतीं। साधारण बिना चीनी वाली दही के अलावा फ्लेवर्ड और मीठी दही भी उपलब्ध होती हैं। इनमें अतिरिक्त चीनी हो सकती है। नियमित सेवन के लिए उत्पाद खरीदते समय उसके पोषण संबंधी लेबल और सामग्री की सूची देखना उपयोगी है।
अगर पैकेट वाली दही में अतिरिक्त चीनी, फ्लेवर या दूसरी सामग्री अधिक मात्रा में शामिल है, तो वह साधारण घर की दही से अलग विकल्प बन जाती है। खासतौर पर जो लोग अपने कुल शुगर सेवन को नियंत्रित करना चाहते हैं, उनके लिए बिना अतिरिक्त चीनी वाली दही चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है।
दही को अक्सर पाचन से भी जोड़ा जाता है। फर्मेंटेशन के दौरान बनने वाले बैक्टीरिया दही की खासियत हैं, लेकिन हर दही को अपने आप 'प्रोबायोटिक' मान लेना सही नहीं है। प्रोबायोटिक लाभ विशिष्ट जीवित सूक्ष्मजीवों, उनकी मात्रा और उत्पाद में उनके जीवित रहने पर निर्भर करते हैं। यदि कोई पैकेट वाला उत्पाद प्रोबायोटिक होने का दावा करता है तो उसके लेबल पर दी गई जानकारी देखी जा सकती है।
घर की दही में भी जीवित बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं, लेकिन उनकी किस्म और मात्रा हर बार एक जैसी होना जरूरी नहीं है। दही जमाने का तापमान, इस्तेमाल किया गया स्टार्टर, दूध और उसे कितनी देर तक जमाया गया है, इन सभी चीजों से अंतिम उत्पाद प्रभावित हो सकता है।
स्वच्छता के मामले में भी दोनों विकल्पों में कुछ बातें ध्यान रखने योग्य हैं। घर की दही बनाते समय साफ बर्तन, सुरक्षित दूध और उचित तापमान का इस्तेमाल जरूरी है। दही जमने के बाद उसे लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ने के बजाय फ्रिज में रखना चाहिए।
पैकेट वाली दही लेते समय उसकी एक्सपायरी या 'यूज बाय' तारीख देखनी चाहिए। पैकेट फूला हुआ हो, सील टूटी हो या दही की गंध और रंग असामान्य लगे तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए। खरीदने के बाद पैकेट पर दिए गए स्टोरेज निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।
कैलोरी और फैट के मामले में भी घर और बाजार की दही का अंतर मुख्य रूप से दूध और उत्पाद की संरचना पर निर्भर करता है। फुल-फैट दूध से बनी घर की दही में फैट अधिक हो सकता है, जबकि टोंड दूध से बनी दही में अपेक्षाकृत कम। इसी तरह बाजार में भी अलग-अलग फैट स्तर वाले विकल्प उपलब्ध होते हैं।
तो आखिर कौन ज्यादा फायदेमंद है? इसका जवाब व्यक्ति की जरूरत और चुने गए उत्पाद पर निर्भर करता है। अगर घर में स्वच्छ तरीके से साधारण दही जमाई जाती है तो यह रोजमर्रा के भोजन के लिए अच्छा और सुविधाजनक विकल्प है। वहीं अच्छी गुणवत्ता वाली, बिना अतिरिक्त चीनी की साधारण पैकेट दही भी पौष्टिक विकल्प हो सकती है। केवल 'घर की' या 'पैकेट वाली' होने के आधार पर किसी एक को हमेशा बेहतर नहीं कहा जा सकता।
अगर आप बाजार से दही खरीद रहे हैं तो सामग्री की सूची छोटी और सरल होना एक उपयोगी संकेत हो सकता है। अतिरिक्त चीनी की मात्रा, प्रोटीन, फैट और अन्य पोषण संबंधी जानकारी भी देखनी चाहिए। वहीं घर पर दही बनाते समय साफ-सफाई और उचित स्टोरेज पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
दही संतुलित आहार का हिस्सा बन सकती है, लेकिन इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। दूध से एलर्जी वाले लोगों को दही से भी समस्या हो सकती है। लैक्टोज असहिष्णुता वाले कुछ लोग दूध की तुलना में दही को बेहतर तरीके से पचा पाते हैं, लेकिन यह हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।
कुल मिलाकर, बिना अतिरिक्त चीनी वाली और स्वच्छ तरीके से तैयार दही सबसे व्यावहारिक विकल्प है। घर की ताजा दही में सामग्री पर आपका पूरा नियंत्रण रहता है, जबकि पैकेट वाली दही सुविधा और नियंत्रित उत्पादन का फायदा देती है। इसलिए दोनों में से चुनाव करते समय केवल पैकेजिंग नहीं, बल्कि दूध की गुणवत्ता, सामग्री, अतिरिक्त चीनी, पोषण लेबल और अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
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