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लाइफ स्टाइल
Premananda Maharaj :क्या बहुत ज़्यादा पूजा-पाठ और अनुष्ठान करने से दुख बढ़ता है, प्रेमानंद महाराज ने दिया उत्तर
Sarita
2 July 2025 2:51 PM IST

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Premananda Maharaj: प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि सच्ची और भक्तिपूर्ण पूजा से कभी दुख नहीं बढ़ते, बल्कि वे घटते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। दुखों के बढ़ने का कारण पूजा नहीं, बल्कि उसके पीछे की गलत भावना, अधूरी समझ या अज्ञानता है। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति दिखावे के लिए, स्वार्थवश या बिना समझे पूजा करता है, तो उसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते और निराशा के कारण दुख बढ़ सकते हैं।
यदि कोई व्यक्ति केवल कामना पूर्ति के लिए पूजा करता है और फल की अत्यधिक इच्छा रखता है, तो कामना पूरी न होने पर उसे गहरा दुख होता है। सच्ची भक्ति बिना किसी फल की इच्छा के कर्म करना है।
कुछ लोग दूसरों को प्रभावित करने या अपनी धार्मिकता का दिखावा करने के लिए पूजा करते हैं। ऐसे में जब उन्हें समाज से अपेक्षित सम्मान या मान्यता नहीं मिलती, तो अहंकार को ठेस पहुंचती है और दुख का अनुभव होता है।
कभी-कभी लोग पूजा-पाठ के कर्मकांडों में इतने उलझ जाते हैं कि वे ईश्वर के प्रति अपनी भावना और प्रेम को भूल जाते हैं। जब वे केवल कर्मकांड करते हैं और दिल से नहीं जुड़ते, तो उन्हें आंतरिक शांति नहीं मिलती और पूजा बोझिल लगने लगती है, जिससे निराशा हो सकती है।
यदि पूजा का मुख्य उद्देश्य केवल धन, प्रसिद्धि या भौतिक सुख प्राप्त करना है और ये चीजें प्राप्त नहीं होती हैं, तो व्यक्ति दुखी हो जाता है। प्रेमानंद महाराज इस बात पर जोर देते हैं कि हमने पिछले सभी जन्मों में जो भी कर्म किए हैं, हमें उन कर्मों को उस जन्म में भी भुगतना पड़ता है, जिसमें हमें लगता है कि हम हमेशा भगवान का नाम जपते हैं।
जब कोई व्यक्ति अपनी पूजा की तुलना दूसरों से करता है और देखता है कि दूसरों को "अधिक" मिल रहा है, तो उसके अंदर ईर्ष्या और असंतोष पैदा होता है। यह तुलना उसे उसकी भक्ति से दूर कर देती है और दुख का कारण बनती है।
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