- Home
- /
- लाइफ स्टाइल
- /
- गर्भ में ही शुरू होती...
लाइफ स्टाइल
गर्भ में ही शुरू होती है Music क्लास, सुर-ताल से बढ़ती है बच्चों की बोलने और समझने की क्षमता
Harrison
9 Feb 2026 8:40 PM IST

x
Lifestyle ,लाइफस्टाइल : शोध और अनुभवों के अनुसार, बच्चों का संगीत और भाषा सीखने का सफर मां के गर्भ से ही शुरू हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भ में शिशु को सुनाई देने वाली ध्वनियाँ और संगीत उनके मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संगीत न केवल बच्चे के मानसिक विकास को प्रभावित करता है बल्कि भाषा, बोलने की क्षमता और स्मरण शक्ति को भी बढ़ाता है।
संगीत विशेषज्ञों और बच्चों के विकास पर काम करने वाले मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जो बच्चे गर्भ में ही नियमित रूप से संगीत सुनते हैं, उनमें जन्म के बाद शब्दों को समझने और जल्दी बोलने की क्षमता अधिक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुर और ताल की नियमित अनुभूति बच्चों के मस्तिष्क में न्यूरल कनेक्शन्स को मजबूत करती है, जिससे भाषा सीखने की प्रक्रिया तेज होती है।
डॉक्टर और संगीत शिक्षक रामकृष्ण वर्मा बताते हैं, “गर्भ में ही जब बच्चे को रिदमिक ध्वनियाँ और सुर सुनाई देते हैं, तो उसके मस्तिष्क में भाषा और संगीत के लिए आवश्यक न्यूरल नेटवर्क विकसित होने लगते हैं। यह बच्चे को जन्म के बाद जल्दी बोलने और शब्दों को पहचानने में मदद करता है।”
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान मां द्वारा गाया गया या सुनाया गया संगीत बच्चे की सुनने और समझने की क्षमता को बढ़ाता है। खासकर क्लासिकल संगीत और तालबद्ध गीत बच्चों के मानसिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। इससे बच्चे का ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी बेहतर होती है और उनकी याददाश्त मजबूत होती है।
संगीत से जुड़ी यह आदत जन्म के बाद भी जारी रहती है। बच्चों को छोटे-छोटे सुर और ताल सिखाने से उनका भाषाई विकास और भी तेज़ हो जाता है। बच्चों को लय और ध्वनि की पहचान कराने वाले खेल और गीत उनके शब्द ज्ञान और संवाद क्षमता में सुधार करते हैं। इससे बच्चे जल्दी बोलने के साथ-साथ सही उच्चारण भी सीखते हैं।
मनोवैज्ञानिक और बच्चों के विकास विशेषज्ञ डॉ. शालिनी चौधरी कहती हैं, “सुर और ताल का अनुभव बच्चों में रचनात्मकता, ध्यान और स्मृति को बढ़ाता है। माता-पिता अगर गर्भ में ही अपने बच्चे को संगीत सुनाएँ और बाद में उसे लयबद्ध गतिविधियों में शामिल करें, तो इसका लाभ कई वर्षों तक दिखाई देता है।”
अध्ययन बताते हैं कि ऐसे बच्चे, जिन्हें गर्भ में संगीत सुनाया गया और जन्म के बाद ताल और सुर की गतिविधियों में शामिल किया गया, उनके मस्तिष्क की ऑडिटरी और भाषाई सर्किट्स अधिक विकसित होते हैं। इससे उनकी भाषा समझ, बोलने की गति और सामाजिक संवाद क्षमता में तेजी आती है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाएँ रोजाना 15–20 मिनट संगीत सुनें और गुनगुनाएँ। जन्म के बाद भी बच्चों के साथ लयबद्ध खेल, गीत और कथाएँ साझा करना उनके संज्ञानात्मक और भाषाई विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
संक्षेप में कहा जाए, तो संगीत का प्रभाव गर्भावस्था से शुरू होकर बच्चे के जीवन में कई वर्षों तक दिखाई देता है। सुर और ताल की नियमित अनुभूति बच्चे की भाषा, बोलने की क्षमता, स्मरण शक्ति और मानसिक विकास के लिए अनमोल साबित होती है। इस शोध और अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि ‘म्यूजिक क्लास’ केवल स्कूल में ही नहीं बल्कि मां के गर्भ में ही शुरू हो जाती है।
Tagsगर्भम्यूजिकक्लाससुरतालबढ़तीबच्चोंबोलनेसमझनेक्षमताPregnancymusicclassrhythmdevelopingchildrenspeakingunderstandingabilityजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





