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किचन में करें ये छोटा बदलाव, सेहत को मिलेंगे बड़े फायदे; डॉक्टर की सलाह

नई दिल्ली : स्वादिष्ट भोजन बनाने के साथ-साथ यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि खाना किन बर्तनों में पकाया और स्टोर किया जा रहा है। आज अधिकांश घरों में प्लास्टिक, स्टील, कांच, तांबा, एल्युमिनियम और विभिन्न धातुओं से बने बर्तनों का इस्तेमाल होता है, लेकिन सभी सामग्री स्वास्थ्य के लिए समान रूप से सुरक्षित नहीं मानी जाती। ऑन्कोसर्जन डॉ. वर्तिका विश्वानी ने हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए ऐसे कुकवेयर और स्टोरेज विकल्पों की जानकारी साझा की है, जिन्हें वह स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक भरोसेमंद मानती हैं।
डॉ. विश्वानी के अनुसार, खाने का स्वाद ही नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा भी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस प्रकार के बर्तनों में रखा और पकाया जाता है। कुछ प्लास्टिक और निम्न गुणवत्ता वाली धातुओं से बने बर्तनों में लंबे समय तक खाद्य पदार्थ रखने पर उनमें मौजूद रसायनों के भोजन में मिलने का खतरा रहता है, इसलिए सही सामग्री का चुनाव बेहद जरूरी है।
उन्होंने सलाह दी कि खाने का तेल हमेशा कांच की बोतल में स्टोर करना बेहतर विकल्प है। खासकर गर्मी, धूप या लंबे समय तक प्लास्टिक अथवा कुछ धातु की बोतलों में तेल रखने पर उनमें मौजूद प्लास्टिसाइज़र या अन्य रासायनिक तत्व धीरे-धीरे तेल में मिल सकते हैं। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। कांच की बोतलें रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती हैं और तेल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करती हैं।
अचार के भंडारण के लिए भी उन्होंने कांच या फूड-ग्रेड सिरेमिक कंटेनर को सबसे उपयुक्त बताया। भारतीय अचार में नमक, तेल और अम्लीय तत्व अधिक मात्रा में होते हैं, जो कुछ धातुओं और प्लास्टिक के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। इससे न केवल अचार का स्वाद और रंग प्रभावित हो सकता है, बल्कि हानिकारक तत्व भी भोजन में मिल सकते हैं। कांच और सिरेमिक इन प्रतिक्रियाओं से मुक्त रहते हैं, इसलिए अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
खाना पकाने के लिए डॉक्टर कास्ट आयरन यानी लोहे के तवे और अप्पे मेकर के उपयोग को प्राथमिकता देती हैं। उनके अनुसार, कास्ट आयरन के बर्तनों में नॉन-स्टिक कोटिंग खराब होने जैसी चिंता नहीं रहती। ये बेहद टिकाऊ होते हैं और वर्षों तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसके अलावा इनमें भोजन पकाने से थोड़ी मात्रा में आयरन भी भोजन में मिल सकता है, जो शरीर के लिए लाभदायक हो सकता है। कास्ट आयरन गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखता है, जिससे खाना समान रूप से पकता है और ऊर्जा की भी बचत होती है।
पानी पीने के लिए उन्होंने स्टेनलेस स्टील या तांबे की बोतलों को बेहतर विकल्प बताया। उनका कहना है कि स्टील की बोतलें साफ करना आसान होता है और इनमें लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी दुर्गंध नहीं आती। प्रोटीन शेक जैसी चीजों के लिए भी स्टील की बोतलें अधिक सुविधाजनक मानी जाती हैं। बच्चों के लिए भी अंदर से स्टील कोटिंग वाली बोतलों का उपयोग बेहतर माना जाता है क्योंकि इन्हें साफ रखना आसान होता है और इनमें पानी लंबे समय तक गर्म या ठंडा बना रहता है।
डॉ. विश्वानी का कहना है कि उनकी अपनी रसोई में अधिकांश बर्तन स्टील और लोहे के बने हुए हैं। ये मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक उपयोग के लिए उपयुक्त होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से हानिकारक रसायन भोजन में नहीं मिलते, जिससे खाना अधिक सुरक्षित रहता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी बर्तन का चयन करते समय उसकी गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग उतरने लगे, प्लास्टिक के कंटेनर टूट-फूट जाएं या धातु के बर्तनों में जंग लग जाए तो उन्हें बदल देना चाहिए। साथ ही भोजन को लंबे समय तक अनुचित तापमान या गलत कंटेनर में रखने से भी बचना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार के साथ सही कुकवेयर का चुनाव भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उचित बर्तनों का इस्तेमाल न केवल भोजन की गुणवत्ता बनाए रखता है, बल्कि लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है।





