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UNESCO लिस्ट में भारत की बड़ी उपलब्धि 5 नई जगहें हुईं शामिल

Ratna Netam
30 Sept 2026 2:14 PM IST
UNESCO लिस्ट में भारत की बड़ी उपलब्धि 5 नई जगहें हुईं शामिल
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लाइफ स्टाइल : भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में भारत से पांच नई प्रविष्टियां हाल के महीनों में शामिल हुई हैं। इनमें सबसे खास बात यह है कि चार स्थान अकेले मध्य प्रदेश से हैं। इनमें बाघ गुफा चित्रकला, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के बटेश्वर-पड़ावली-ककनमठ मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। पांचवीं प्रविष्टि महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जुड़े स्थलों की श्रृंखला है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन स्थानों को अभी UNESCO की अंतिम विश्व धरोहर सूची में शामिल नहीं किया गया है, बल्कि ये भविष्य में विश्व धरोहर का दर्जा पाने के लिए विचार की जाने वाली टेंटेटिव लिस्ट में आए हैं। UNESCO की भारत संबंधी टेंटेटिव लिस्ट में फिलहाल 78 प्रविष्टियां दर्ज हैं।
मध्य प्रदेश के चारों सांस्कृतिक स्थलों को 8 जुलाई 2026 को UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया। इससे मध्य प्रदेश की प्राचीन कला, स्थापत्य, धार्मिक विरासत और आदिवासी इतिहास को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और मजबूती मिली है। ये चारों स्थान अलग-अलग कालखंडों और स्थापत्य परंपराओं की कहानी बताते हैं।
सबसे प्रमुख नाम बाघ गुफाओं का है। मध्य प्रदेश की बाघनी नदी के किनारे विंध्य पर्वतमाला की दक्षिणी ढलान पर स्थित बाघ गुफाओं का निर्माण लगभग चौथी से छठी शताब्दी के बीच माना जाता है। यहां कुल नौ शैलकृत बौद्ध गुफाएं हैं। ये गुफाएं विशेष रूप से अपनी प्राचीन भित्तिचित्र कला के लिए जानी जाती हैं। UNESCO के विवरण के अनुसार गुफा नंबर चार, जिसे रंग महल कहा जाता है, में महत्वपूर्ण चित्रकला और स्थापत्य अवशेष मौजूद हैं। यहां के चित्रों में राजदरबार, जुलूस, नर्तक, संगीतकार और उस दौर के सामाजिक जीवन की झलक दिखाई देती है। बाघ की चित्रकला को अजंता की चित्रकला परंपरा से जुड़ा माना जाता है, लेकिन इसकी अपनी विशिष्ट क्षेत्रीय शैली भी है।
दूसरा महत्वपूर्ण स्थान गिन्नौरगढ़ किला है। यह मध्य प्रदेश के वर्तमान रातापानी क्षेत्र के घने जंगलों और पहाड़ी इलाके में स्थित है। इसे मध्य भारत में राज गोंड शासकों की प्रमुख किलेबंद राजधानियों में गिना जाता है। किले की स्थिति ऐसी जगह पर है, जहां खड़ी पहाड़ियां, घाटियां और घना जंगल प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते थे। यह 16वीं से 18वीं शताब्दी के शुरुआती दौर तक गोंड शासन के महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में इस्तेमाल हुआ। इसकी बनावट में रक्षा व्यवस्था, जल प्रबंधन और आदिवासी शासन प्रणाली से जुड़ी विशेषताएं देखने को मिलती हैं। UNESCO के दस्तावेज में इसे मध्य भारत की आदिवासी किला स्थापत्य परंपरा का दुर्लभ उदाहरण बताया गया है।
तीसरी प्रविष्टि चंबल घाटी में मौजूद बटेश्वर, पड़ावली और ककनमठ मंदिरों का समूह है। ये मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के आसपास स्थित हैं। इनका निर्माण लगभग आठवीं से 11वीं शताब्दी के बीच हुआ माना जाता है। ये स्थल मध्य भारत में नागर शैली के मंदिर स्थापत्य के विकास को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन मंदिरों में गुर्जर-प्रतिहार और कच्छपघात शासकों के समय की स्थापत्य परंपराओं की झलक मिलती है। बटेश्वर अपने बड़ी संख्या में मौजूद छोटे-बड़े मंदिरों के समूह के लिए प्रसिद्ध है, जबकि पड़ावली और ककनमठ अपनी विशाल संरचना और बारीक शिल्पकला के लिए पहचाने जाते हैं। तीनों को एक संयुक्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में टेंटेटिव लिस्ट में स्थान मिला है।
चौथा नाम उदयगिरि गुफाओं का है। मध्य प्रदेश स्थित उदयगिरि पहाड़ी में लगभग 20 शैलकृत गुफाएं मौजूद हैं। इनका विकास मुख्य रूप से गुप्त काल में चौथी शताब्दी के अंत और पांचवीं शताब्दी के शुरुआती दौर में हुआ। यह स्थान भारतीय कला और धार्मिक स्थापत्य के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां भगवान विष्णु के वराह अवतार का विशाल शैलचित्र विशेष आकर्षण है। इसके अलावा अनंतशायी विष्णु की प्रतिमा, प्राचीन अभिलेख और कई धार्मिक संरचनाएं यहां मौजूद हैं। UNESCO के अनुसार उदयगिरि उस दौर का प्रतिनिधित्व करता है जब भारत में शैलकृत धार्मिक स्थलों से स्वतंत्र मंदिर वास्तुकला की दिशा में बदलाव हो रहा था।
इन चार मध्य प्रदेश की प्रविष्टियों के अलावा 3 सितंबर 2026 को सत्याग्रह से जुड़े स्थलों की एक नई श्रृंखला भी भारत की टेंटेटिव लिस्ट में जोड़ी गई। यह प्रस्ताव भारत और दक्षिण अफ्रीका से जुड़े महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन की यात्रा को दर्शाता है। इसमें कुल नौ प्रमुख घटक प्रस्तावित हैं, जिनमें दो दक्षिण अफ्रीका और सात भारत में हैं। भारत में चंपारण का महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, साबरमती आश्रम, मणि भवन, हरिजन सेवक संघ परिसर, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति शामिल हैं। ये स्थान सत्याग्रह के विकास, अहिंसक आंदोलन और गांधी के सामाजिक-राजनीतिक विचारों से जुड़े अलग-अलग चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में जगह मिलना किसी स्थल को सीधे विश्व धरोहर का दर्जा मिलना नहीं है। यह विश्व धरोहर सूची में भविष्य की संभावित दावेदारी की शुरुआती प्रक्रिया है। कोई देश जिन स्थानों को भविष्य में विश्व धरोहर के लिए नामित करना चाहता है, उन्हें पहले अपनी टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करता है। इसके बाद विस्तृत दस्तावेज, संरक्षण योजना और अन्य प्रक्रियाओं के आधार पर किसी स्थल को औपचारिक नामांकन के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
इन नई प्रविष्टियों में मध्य प्रदेश की मजबूत मौजूदगी राज्य की विविध विरासत को सामने लाती है। एक तरफ बाघ और उदयगिरि जैसी प्राचीन गुफाएं भारतीय कला और धार्मिक इतिहास की कहानी कहती हैं, तो दूसरी ओर गिन्नौरगढ़ गोंड शासन और आदिवासी स्थापत्य की विरासत को सामने लाता है। चंबल घाटी के मंदिर मध्यकालीन भारत की स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण अध्याय हैं। इनके UNESCO टेंटेटिव लिस्ट में आने से इन ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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