लाइफ स्टाइल

घर में गणपति विसर्जन कैसे करें जानें आसान तरीका

Ratna Netam
14 Sept 2026 9:45 PM IST
घर में गणपति विसर्जन कैसे करें जानें आसान तरीका
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लाइफ स्टाइल : गणेश चतुर्थी के साथ ही देशभर में गणपति उत्सव की शुरुआत होती है। भक्त अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। कोई डेढ़ दिन तो कोई तीन, पांच, सात या दस दिनों तक बप्पा को अपने घर में विराजमान रखता है। इसके बाद श्रद्धा और भावनाओं के साथ गणपति विसर्जन किया जाता है। आमतौर पर विसर्जन के लिए लोग नदी, तालाब या निर्धारित घाटों पर जाते हैं, लेकिन हर किसी के लिए घाट तक जाना संभव नहीं होता। ऐसे में घर पर भी सम्मानपूर्वक और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से गणपति बप्पा की विदाई की जा सकती है।
खासकर छोटी और मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन घर पर आसानी से किया जा सकता है। इससे नदी-तालाबों में प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है और भीड़भाड़ वाले विसर्जन स्थलों पर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती। हालांकि, घर में विसर्जन करते समय प्रतिमा की सामग्री और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है।
विसर्जन से पहले करें बप्पा की पूजा
गणपति विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है। जिस स्थान पर बप्पा की स्थापना की गई है, वहां साफ-सफाई कर दीपक जलाएं। भगवान गणेश को फूल, दूर्वा, फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। मोदक या लड्डू भी चढ़ाए जा सकते हैं।
इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान गणेश की आरती कर सकते हैं। पूजा के दौरान जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
विसर्जन का मूल भाव भगवान गणेश को सम्मान और श्रद्धा के साथ विदाई देना है। इसलिए बड़ी व्यवस्था या नदी-तालाब तक जाना ही आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए। घर में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार श्रद्धापूर्वक विदाई की जा सकती है।
घर में कैसे करें गणपति विसर्जन?
अगर आपके घर में स्थापित गणेश प्रतिमा प्राकृतिक मिट्टी से बनी छोटी प्रतिमा है तो एक साफ और पर्याप्त बड़े टब या पात्र में पानी भरकर विसर्जन किया जा सकता है। पात्र इतना बड़ा होना चाहिए कि प्रतिमा आसानी से उसमें समा जाए।
पूजा और आरती पूरी होने के बाद प्रतिमा को स्थापना स्थल से धीरे से उठाएं। इस दौरान परिवार के सदस्य “गणपति बप्पा मोरया” और अगले वर्ष फिर आने की कामना के साथ जयकारा लगा सकते हैं।
इसके बाद प्रतिमा को पानी से भरे पात्र में सम्मानपूर्वक रखें। उसे जबरदस्ती तोड़ने या दबाने से बचें। प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा पानी के संपर्क में आने के बाद धीरे-धीरे गलने लगती है। इसमें कुछ घंटे या प्रतिमा के आकार के अनुसार अधिक समय भी लग सकता है।
प्रतिमा पूरी तरह घुलने के बाद उस पानी और मिट्टी को बेकार समझकर नाली में बहाने के बजाय पौधों या बगीचे की मिट्टी में डालने का विकल्प चुना जा सकता है, बशर्ते प्रतिमा में केवल प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण के अनुकूल रंगों का इस्तेमाल हुआ हो।
बाल्टी या टब में भी हो सकता है विसर्जन
छोटी गणेश प्रतिमा के लिए बाल्टी, टब या कोई बड़ा पात्र इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें कि जिस पात्र में विसर्जन किया जा रहा है वह साफ हो और उसमें पहले से कोई केमिकल या गंदगी न हो।
घर में जगह कम है तो बालकनी, आंगन या ऐसी सुरक्षित जगह पर विसर्जन की व्यवस्था की जा सकती है जहां पानी फैलने से परेशानी न हो।
अगर प्रतिमा बड़ी है और घर के पात्र में सुरक्षित तरीके से विसर्जित नहीं की जा सकती तो उसे तोड़कर छोटे हिस्सों में करने के बजाय स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंड का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति पर रखें ध्यान
घर में विसर्जन करने से पहले यह पता करना जरूरी है कि गणेश प्रतिमा किस सामग्री से बनी है। प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा पानी में आसानी से घुल सकती है, लेकिन प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी POP की प्रतिमा का व्यवहार अलग होता है।
POP की मूर्तियां जल्दी नहीं घुलतीं और उनमें इस्तेमाल किए गए कुछ रंग पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए ऐसी प्रतिमाओं को घर के टब में विसर्जित करने के बाद उस पानी को पौधों में डालना उचित नहीं है।
ऐसी प्रतिमा होने पर स्थानीय नगर निकाय या प्रशासन की ओर से निर्धारित विसर्जन स्थल, कृत्रिम कुंड या प्रतिमा संग्रह केंद्र का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित है। स्थानीय नियम अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने शहर के निर्देशों का पालन करें।
फूल और पूजा सामग्री पानी में न डालें
गणपति विसर्जन के दौरान एक महत्वपूर्ण बात पूजा सामग्री के निस्तारण से जुड़ी है। प्रतिमा के साथ प्लास्टिक, कपड़े, सजावट, थर्माकोल, पॉलिथीन या अन्य गैर-जैविक सामग्री पानी में नहीं डालनी चाहिए।
पूजा में इस्तेमाल किए गए फूल, पत्तियां और दूसरी जैविक सामग्री को अलग किया जा सकता है। जहां संभव हो, इनका इस्तेमाल कम्पोस्ट बनाने में किया जा सकता है। प्लास्टिक या अन्य कृत्रिम सजावट को सूखे कचरे के अनुसार अलग करके उचित तरीके से निस्तारित करें।
इससे विसर्जन के धार्मिक भाव को बनाए रखते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से भी बचा जा सकता है।
पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन क्यों है जरूरी?
गणेश उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है और विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में प्रतिमाएं जल स्रोतों तक पहुंचती हैं। यदि मूर्तियों में कृत्रिम सामग्री और रासायनिक रंग मौजूद हों तो वे पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं और कृत्रिम विसर्जन कुंडों को बढ़ावा दिया जा रहा है। घर पर प्राकृतिक मिट्टी की छोटी प्रतिमा का विसर्जन भी इसी दिशा में एक आसान विकल्प हो सकता है।
अगली बार गणेश प्रतिमा खरीदते समय भी यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रतिमा प्राकृतिक मिट्टी से बनी हो और उस पर पर्यावरण के अनुकूल रंगों का इस्तेमाल किया गया हो। इससे विसर्जन के समय परेशानी कम होगी।
घर पर विसर्जन में रखें इन बातों का ध्यान
घर पर गणेश विसर्जन करते समय सुरक्षा का भी ध्यान रखें। बहुत बड़ी या भारी प्रतिमा को अकेले उठाने की कोशिश न करें। बिजली की झालरों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से पानी को दूर रखें। बच्चों को पानी से भरे बड़े टब के पास अकेला न छोड़ें।
विसर्जन के दौरान प्रतिमा को सम्मानपूर्वक संभालें और जल्दबाजी से बचें। यदि प्रतिमा की सामग्री को लेकर जानकारी नहीं है तो उसके घुले हुए पानी को सीधे पौधों में इस्तेमाल न करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विसर्जन को लेकर स्थानीय प्रशासन या नगर निकाय ने कोई विशेष व्यवस्था या नियम जारी किए हैं तो उनका पालन किया जाए।
भावनाओं से जुड़ी है बप्पा की विदाई
गणपति विसर्जन का पल भक्तों के लिए भावुक होता है। कई दिनों तक घर में बप्पा की पूजा करने के बाद उनकी विदाई करते समय परिवार के लोग अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की कामना करते हैं। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयकारा इसी भावना को व्यक्त करता है।
अगर घाट तक जाना संभव नहीं है तो इससे श्रद्धा में कोई कमी नहीं आती। प्राकृतिक मिट्टी की छोटी प्रतिमा का घर में सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से विसर्जन किया जा सकता है।
इस तरह बप्पा की विदाई धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी निभाने का भी अवसर बन सकती है। साफ पानी, प्राकृतिक मिट्टी और उचित तरीके से पूजा सामग्री का निस्तारण करके घर पर ही गणपति विसर्जन किया जा सकता है। बप्पा को श्रद्धा से विदा करें और अगले वर्ष फिर सुख-समृद्धि के साथ उनके आगमन की कामना करें।
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