लाइफ स्टाइल

चेहरे की रंगत बिगाड़ रहा कालापन तो आजमाएं ये नुस्खे

Ratna Netam
14 Sept 2026 6:16 PM IST
चेहरे की रंगत बिगाड़ रहा कालापन तो आजमाएं ये नुस्खे
x
लाइफ स्टाइल : चेहरे की साफ और एक समान रंगत हर किसी को पसंद होती है, लेकिन कई बार मुंह और होंठों के आसपास की त्वचा बाकी चेहरे की तुलना में ज्यादा डार्क दिखाई देने लगती है। इसे आम तौर पर पिगमेंटेशन या हाइपरपिगमेंटेशन कहा जाता है। धूप, त्वचा में जलन, बार-बार रगड़ना, मुंह के आसपास रूखापन या किसी स्किन प्रोडक्ट से होने वाली प्रतिक्रिया इसके पीछे हो सकती है। कुछ मामलों में हार्मोनल बदलाव या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी त्वचा के रंग में बदलाव से जुड़ी हो सकती हैं।
मुंह के आसपास अचानक कालापन दिखाई देने पर लोग अक्सर इसे जल्दी साफ करने के लिए कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं। हालांकि त्वचा पर नींबू, बेकिंग सोडा या दूसरे तेज पदार्थ सीधे लगाना नुकसानदायक हो सकता है। इससे जलन और सूजन बढ़ सकती है और पिगमेंटेशन पहले से ज्यादा गहरा हो सकता है। इसलिए घरेलू स्किन केयर में सौम्य चीजों को प्राथमिकता देना बेहतर है।
एलोवेरा जेल का इस्तेमाल
मुंह के आसपास की त्वचा रूखी और संवेदनशील महसूस हो रही है तो एलोवेरा जेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। साफ त्वचा पर थोड़ी मात्रा में शुद्ध और बिना खुशबू वाला एलोवेरा जेल लगाएं। इससे त्वचा को मॉइस्चराइज रखने और रूखेपन को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि एलोवेरा को पिगमेंटेशन मिटाने वाला निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर है। अगर खुजली, लालिमा या जलन महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
ओट्स का सौम्य DIY पैक
त्वचा की देखभाल के लिए ओट्स का सौम्य पैक बनाया जा सकता है। बारीक पिसे हुए ओट्स में थोड़ा पानी मिलाकर मुलायम पेस्ट तैयार करें। इसे मुंह के आसपास बहुत हल्के हाथ से लगाएं और कुछ मिनट बाद पानी से साफ कर लें। इसे जोर से स्क्रब नहीं करना चाहिए।
ओट्स का उद्देश्य त्वचा को रगड़कर गोरा करना नहीं बल्कि रूखी और संवेदनशील त्वचा को सौम्य देखभाल देना है। पिगमेंटेशन वाले हिस्से को बार-बार स्क्रब करने से समस्या बढ़ सकती है।
दही लगाते समय रखें सावधानी
दही का इस्तेमाल लंबे समय से घरेलू फेस पैक में किया जाता रहा है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा पर हल्का एक्सफोलिएटिंग प्रभाव डाल सकता है। अगर आपकी त्वचा इसे सहन करती है तो थोड़ी मात्रा में सादा दही कुछ मिनट के लिए लगाया जा सकता है और बाद में पानी से धोया जा सकता है।
लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में दही भी जलन पैदा कर सकता है। इसलिए पहले पैच टेस्ट करें। किसी तरह की जलन होने पर तुरंत धो लें। इसे रोजाना लगाने या लंबे समय तक त्वचा पर छोड़ने की जरूरत नहीं है।
मॉइस्चराइजर को न करें नजरअंदाज
मुंह के आसपास बार-बार होने वाला रूखापन त्वचा को संवेदनशील बना सकता है। ऐसे में नियमित रूप से सौम्य मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। फ्रेगरेंस-फ्री मॉइस्चराइजर त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है।
चेहरा धोने के तुरंत बाद हल्की नम त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगाना उपयोगी हो सकता है। अगर मुंह के आसपास की त्वचा बार-बार फटती है या पपड़ी बनती है तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होगा।
सनस्क्रीन है बेहद जरूरी
पिगमेंटेशन की देखभाल में सनस्क्रीन सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। सूरज की यूवी किरणें मौजूदा पिगमेंटेशन को और गहरा कर सकती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाया जा सकता है।
सनस्क्रीन केवल गाल और माथे पर नहीं बल्कि मुंह के आसपास की त्वचा पर भी सावधानी से लगाएं। लंबे समय तक बाहर रहने, पसीना आने या सनस्क्रीन हट जाने की स्थिति में उत्पाद के निर्देशों के अनुसार इसे दोबारा लगाना पड़ सकता है।
नींबू से दूरी बनाना बेहतर
चेहरे का कालापन दूर करने के लिए नींबू का रस लगाने का नुस्खा अक्सर बताया जाता है, लेकिन इसे सीधे चेहरे पर लगाना सुरक्षित विकल्प नहीं है। नींबू अत्यधिक एसिडिक होता है और इससे त्वचा में जलन हो सकती है। धूप के संपर्क में आने पर कुछ साइट्रस पदार्थ त्वचा की प्रतिक्रिया को और गंभीर बना सकते हैं।
इसी तरह बेकिंग सोडा और टूथपेस्ट को भी पिगमेंटेशन हटाने के लिए चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। त्वचा में जलन होने के बाद पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन विकसित हो सकता है, जिससे काले निशान और ज्यादा दिखाई दे सकते हैं।
बार-बार स्क्रब करने की गलती न करें
मुंह के आसपास कालापन देखकर कुछ लोग रोजाना स्क्रब करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि मृत त्वचा हटने से रंगत तुरंत साफ हो जाएगी। लेकिन ज्यादा रगड़ने से त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत प्रभावित हो सकती है।
चेहरे पर हार्ड स्क्रब, चीनी या दूसरे खुरदरे पदार्थों का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। खासकर पहले से संवेदनशील और पिगमेंटेड हिस्से पर ज्यादा घर्षण समस्या को बढ़ा सकता है।
स्किन केयर प्रोडक्ट्स पर भी दें ध्यान
कई बार नया फेसवॉश, कॉस्मेटिक, लिप प्रोडक्ट या कोई अन्य चीज इस्तेमाल करने के बाद मुंह के आसपास जलन होने लगती है। यदि किसी नए प्रोडक्ट के इस्तेमाल के बाद ही कालापन या खुजली शुरू हुई है तो उस उत्पाद को फिलहाल बंद करके त्वचा की प्रतिक्रिया पर नजर रखना उपयोगी हो सकता है।
एक साथ कई एक्टिव स्किन केयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से भी संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है। ऐसे में स्किन केयर रूटीन को सरल रखना बेहतर है।
DIY से तुरंत नहीं मिटता पिगमेंटेशन
यह समझना जरूरी है कि पिगमेंटेशन आमतौर पर एक-दो दिन में खत्म नहीं होता। घरेलू उपाय त्वचा को मॉइस्चराइज और शांत रखने में मदद कर सकते हैं, लेकिन हर तरह के पिगमेंटेशन को हटाने की गारंटी नहीं देते। सही कारण का पता लगना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अगर कालापन लंबे समय से बना हुआ है, लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ खुजली, दर्द, लालिमा और त्वचा में दूसरे बदलाव भी दिखाई दे रहे हैं तो त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार कारण की पहचान कर उपयुक्त उपचार बता सकते हैं।
कुल मिलाकर मुंह के आसपास के कालेपन के लिए त्वचा को बार-बार रगड़ने या तेज घरेलू पदार्थ लगाने के बजाय सौम्य स्किन केयर अपनाना बेहतर है। मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन को नियमित रूटीन में शामिल करें और एलोवेरा या ओट्स जैसे DIY विकल्प भी पैच टेस्ट के बाद ही इस्तेमाल करें। सबसे जरूरी बात यह है कि त्वचा की रंगत बदलने के वास्तविक कारण को समझें। सुरक्षित और नियमित देखभाल त्वचा को स्वस्थ रखने में ज्यादा मददगार साबित हो सकती है।
Next Story