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लिम्फोमा कैंसर का ही एक प्रकार है, यह बाहरी संक्रमण से लड़ने वाली लिम्फोसाइटों सेल्स या बीमारियों से लड़ने वाली सेल्स में शुरू होता है
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। लिम्फोमा कैंसर का ही एक प्रकार है, यह बाहरी संक्रमण से लड़ने वाली लिम्फोसाइटों सेल्स या बीमारियों से लड़ने वाली सेल्स में शुरू होता है. शोध की मानें तो यह बीमारी महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है. बढ़ती उम्र में लिम्फोमा के होने का खतरा अधिक हो जाता है, क्योंकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब दिनचर्या के कारण इस उम्र में कई तरह की बीमारियां शरीर को घेर लेती है और शरीर का इम्यून सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे टाइप 1 डायबिटीज या ल्यूपस आदि से ग्रस्त व्यक्ति में लिम्फोमा का खतरा अधिक होता है.
लिम्फोमा बीमारी के लक्षण –
लिम्फोमा के शुरुआती लक्षणों में रोगी की लिम्फ नोड्स में सूजन का एहसास हो सकता है.
वेबएमडी के अनुसार लिम्फोमा से ग्रस्त व्यक्ति के शरीर में छोटी-छोटी मुलायम गांठ हो सकती है.
-हड्डी में तेज दर्द महसूस होना.
-शरीर में गर्दन, छाती, बगल और पेट पर गांठ महसूस होना.
-हर समय थका हुआ महसूस करना, सामान्य और छोटी बीमारियों में भी अधिक असहज महसूस होना
-बुखार और खांसी होना.
-रात को सोते वक्त अधिक पसीना आना और शरीर पर चकत्ते होना.
-हर वक्त सांस फूलना और अचानक वजन घट जाना.
-हर समय पेट में दर्द होना.
-आपका पारिवारिक इतिहास भी लिम्फोमा का कारण हो सकता है यानी अगर आपके परिवार में कई लोग इससे ग्रस्त रहे हैं, तो इसका खतरा अधिक हो सकता है.
-एचआईवी एड्स पॉजिटिव होना, एचआईवी एड्स से ग्रसित व्यक्तियों में लिम्फोमा का खतरा अधिक रहता है.
लिम्फोमा कोई आम बीमारी नहीं है, बल्कि यह बेहद गंभीर बीमारी है इसीलिए इनमें से कोई भी लक्षण देखते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए, इस बीमारी में ब्लड स्पेशलिस्ट को दिखाना सही रहेगा.
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