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जो लोग अक्सर एयर ट्रैवल करते हैं, उन्हें किसी न किसी तरह की फिजिकल समस्या होती रहती है
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। जो लोग अक्सर एयर ट्रैवल करते हैं, उन्हें किसी न किसी तरह की फिजिकल समस्या होती रहती है. एयर ट्रेवल करने वाले लोगों को नींद का पैटर्न डिस्टर्ब होने से लेकर, सिर या कान में दर्द की समस्या भी झेलनी पड़ती है. स्लीपफॉउंडेशन के मुताबिक हवाई जहाज की लंबी उड़ान का दिमाग पर काफी गहरा असर पड़ सकता है, इससे स्लीपिंग पैटर्न बदलने के अलावा स्ट्रेस और थकान महसूस होती है. साथ ही घंटों एक ही तरह से बैठे रहने की वजह से आप असहज भी महसूस कर सकते हैं.
यह समस्या तब और बढ़ जाती है, जब आप इंटरनेशनल यात्राएं अधिक करते हैं. अगर आप अलग-अलग देश की यात्राएं करते हैं, तो आपके स्लीपिंग रूटीन में बार-बार बदलाव आता है. यह बदलाव एक बार सेट होने को तैयार होता है कि दोबारा से रूटीन चेंज करने की नौबत आ जाती है. जब हम अलग-अलग टाइम जोन के देशों में जाते हैं, तो भी दिमाग में समय का पैटर्न बदल जाता है और शरीर को उसी हिसाब से नींद आती है, जिस हिसाब से वह नींद का आदी होता है. दूसरे देश में दिन होने की वजह से हम अपने स्लीप साइकिल के खिलाफ जाकर खुद को जागकर रखते हैं, यही वजह है की हमारी रूटीन डिस्टर्ब होती है.
स्लीपिंग पैटर्न डिस्टर्ब होने के लक्षण
-सोने के समय में दिक्क्त महसूस होना.
-दिन में लगातार नींद जैसी स्थति महसूस करना.
-याददाश्त और सोचने से जुड़ी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं.
-मूड ख़राब हो सकता है और आप छोटी सी बात से भी इरिटेट हो सकते हैं.
– कब्ज जैसी समस्या देखने को मिल सकती है.
इन प्रभावों को कम कैसे किया जा सकता है?
-दूसरे टाइम जोन में जा कर सोने के पैटर्न को वहां के हिसाब से एडजस्ट करें.
-अगर सोने मेंज़्यादा दिक्कत आ रही है, तो एक्सपर्ट से मिलकर उनकी सलाह लें.
– बाहर घूमने निकलें, दिन की थकान के बाद आपको रात में नींद अच्छी आएगी.
-अपने बायोलॉजिकल क्लॉक को देश के दिन और रात के साथ सेट करें.
-यात्रा से पहले ही खुद को तैयार करना शुरू कर दें, ताकि ज़्यादा समस्या न हो.
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