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युवाओं में बढ़ रही किडनी की बीमारी, बदलती जीवनशैली और गलत आदतें बनी बड़ी वजह

Kavita2
22 May 2026 12:29 PM IST
युवाओं में बढ़ रही किडनी की बीमारी, बदलती जीवनशैली और गलत आदतें बनी बड़ी वजह
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Lifestyle लाइफ स्टाइल : किडनी की बीमारियों को पहले अधिकतर बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अब युवा वर्ग में भी किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जो एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है।

फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग के नेफ्रोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. योगेश कुमार छाबड़ा के अनुसार, आज के समय में बड़ी संख्या में युवा किडनी की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही है।

डॉक्टरों का कहना है कि पहले किडनी रोगों को उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब तनावपूर्ण जीवन, कम पानी पीना, जंक फूड का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारण युवाओं में किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक बिना लक्षण के रहने वाली यह बीमारी कई बार तब सामने आती है जब किडनी काफी हद तक प्रभावित हो चुकी होती है। यही कारण है कि इसे “साइलेंट डिजीज” भी कहा जाता है।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते जीवनशैली में बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में किडनी रोगों के मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने युवाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, संतुलित आहार लेना, नमक और प्रोसेस्ड फूड का सीमित उपयोग, और नियमित व्यायाम किडनी को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा, बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन भी किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों ने इसे एक बड़ा जोखिम कारक बताया है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

अस्पतालों में आने वाले मामलों के आधार पर डॉक्टरों का कहना है कि अब 20 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में भी किडनी संबंधी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं, जो पहले अपेक्षाकृत दुर्लभ थीं।

फिलहाल, विशेषज्ञों ने जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच को इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका बताया है, ताकि गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले ही बीमारी को नियंत्रित किया जा सके।

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