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तन नहीं, मन की देखभाल भी है जरूरी, डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
jantaserishta.com
11 Nov 2025 1:46 PM IST

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नई दिल्ली: तन से जुड़ी बीमारियों पर हर कोई ध्यान देता है, लेकिन मन और मस्तिष्क से जुड़ी परेशानियों का इलाज कराने से लोग कतराते हैं। यहां तक कि कुछ लोग मानसिक समस्याओं को परेशानी तक मानने से इनकार कर देते हैं, लेकिन तन और मन दोनों का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है, इसलिए इसके संकेतों और लक्षणों को जानकर चिकित्सक से सलाह जरूर लें, लेकिन उसी के साथ जीवनशैली में बदलाव और आहार में परिवर्तन लाने से काफी हद तक मन की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
आयुर्वेद में मन की देखभाल पर भी जोर दिया गया है, जिसे वात दोष से जोड़ा गया है। आयुर्वेद में माना गया है कि जब शरीर में वात दोष बढ़ जाता है, तो मन भय, चिंता, और बेवजह की बातों में उलझने लगता है और काम पर फोकस नहीं कर पाता है। वहीं आधुनिक चिकित्सा में डिप्रेशन को सेरोटोनिन और डोपामाइन से जोड़कर देखा गया है। ये दोनों ही हॉर्मोन मस्तिष्क में बनते हैं और खुशी का अहसास कराते हैं। जब दोनों ही हार्मोन की कमी होती है, तो मन चिंता से ग्रस्त हो जाता है।
डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षणों को पहचानना भी बहुत जरूरी है। डिप्रेशन और एंग्जायटी होने पर बिना वजह मन घबराने लगता है, काम करने का मन नहीं करता, अकेले रहकर रोने का मन करता है, शरीर और मन बीमार महसूस करते हैं, अचानक दिल की धड़कन बढ़ जाती है, भूख कम लगने लगती है, और नींद आने में परेशानी होती है। ऐसे लक्षण ज्यादा समय तक दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
आयुर्वेद में डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षणों से राहत पाने के तरीके बताए गए हैं। आयुर्वेद में अश्वगंधा, ब्राह्मी, जटामांसी, शंख्सपुष्पी, तुलसी और इलायची के सेवन की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि ये सभी जड़ी-बूटियां मस्तिष्क को शांत रखने, तनाव और बैचैनी को कम करने, अच्छी नींद लाने और मन को स्थिर रखने में सहायक होती हैं। किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन मरीज को बहुत आराम देगा।
डिप्रेशन और एंग्जायटी से बचने के लिए योग और प्राणायाम बहुत कारगर उपाय माने गए हैं। इसकी शुरुआत छत या पार्क में खुली जगह से करें। खुद को प्रकृति के करीब रखें और प्राणायाम से जुड़े योग करें। ये मस्तिष्क में ऑक्सीजन के स्तर को सुधारते हैं, जिससे मस्तिष्क पर दबाव कम पड़ता है और रक्त संचार भी अच्छा होता है। इसके लिए सूर्य नमस्कार, भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम प्राणायाम और मेडिटेशन जरूर करें।
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