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लाइफ स्टाइल: पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) आज के समय में महिलाओं में तेजी से बढ़ती समस्या बन गई है। इसमें हार्मोनल असंतुलन, वजन बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस और अनियमित पीरियड्स जैसी दिक्कतें आम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या को कंट्रोल करने में सबसे अहम भूमिका लाइफस्टाइल और खानपान की होती है, खासकर सुबह के नाश्ते की।
सुबह का पहला भोजन अगर सही हो तो यह पूरे दिन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने, एनर्जी बनाए रखने और वजन को संतुलित करने में मदद कर सकता है। इसलिए पीसीओएस मरीजों को हाई कार्ब और शुगर वाले फूड्स से बचकर प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर नाश्ता लेना चाहिए।
ओट्स-बेसन चीला: हेल्दी और फाइबर से भरपूर विकल्प
नाश्ते में ओट्स-बेसन चीला एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो लंबे समय तक पेट भरा रखती है और अनावश्यक भूख को कम करती है। इसे बनाने के लिए ओट्स को पीसकर उसमें बेसन, प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और हरी मिर्च मिलाई जाती है। हल्के तेल या देसी घी में इसे सेंककर खाया जा सकता है।
अंडा भुर्जी और मल्टीग्रेन टोस्ट: प्रोटीन का पावर पैक
नॉन-वेजिटेरियन लोगों के लिए अंडा पीसीओएस में सबसे अच्छा प्रोटीन स्रोत माना जाता है। दो अंडों की भुर्जी में सब्जियां मिलाकर मल्टीग्रेन या होल-व्हीट ब्रेड के साथ इसका सेवन किया जा सकता है। यह हार्मोन बैलेंस करने में मदद करता है और शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देता है।
मूंग दाल इडली या डोसा: हल्का और पौष्टिक विकल्प
साधारण चावल से बने इडली और डोसा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है, जो पीसीओएस में नुकसानदायक हो सकता है। इसकी जगह मूंग दाल से बनी इडली या डोसा बेहतर विकल्प है। मूंग दाल को रातभर भिगोकर पीस लिया जाता है और फिर उससे इडली या डोसा तैयार किया जाता है। यह प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स से भरपूर होता है, जो इंसुलिन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
चिया सीड्स पुडिंग: मीठे की क्रेविंग का हेल्दी समाधान
पीसीओएस में अक्सर मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है। ऐसे में चिया सीड्स पुडिंग एक अच्छा विकल्प है। इसे बादाम या नारियल के दूध में चिया सीड्स भिगोकर तैयार किया जाता है। इसमें बेरीज, कद्दू के बीज और थोड़ा शहद या स्टीविया मिलाया जा सकता है। यह शरीर में सूजन को कम करता है और हार्मोन बैलेंस में मदद करता है।
नाश्ते में इन बातों का रखें खास ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार पीसीओएस मरीजों को अपने नाश्ते में प्रोटीन जरूर शामिल करना चाहिए। अंकुरित अनाज, अंडा, पनीर और दालें इसके अच्छे स्रोत हैं। साथ ही पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड जैसे कॉर्नफ्लेक्स और रेडी-टू-ईट फूड से बचना चाहिए क्योंकि इनमें छिपी हुई शुगर होती है। हेल्दी फैट्स जैसे बादाम, अखरोट, फ्लैक्ससीड्स और कद्दू के बीज भी डाइट में शामिल करने चाहिए।
लाइफस्टाइल और डाइट से मिल सकती है बड़ी राहत
पीसीओएस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही खानपान और लाइफस्टाइल से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सुबह का संतुलित नाश्ता इस दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी इस समस्या को कम करने में मदद करती है।





