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लाइफ स्टाइल
Health: पित्ताशय की पथरी, क्या सर्जरी जरूरी है या आयुर्वेदिक उपचार भी कारगर हो सकता है
Sarita
14 July 2025 10:09 AM IST

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Health : आयुर्वेद की बात करें तो कुछ आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का दावा है कि कुछ हर्बल दवाओं, काढ़ों और सही खान-पान की आदतों की मदद से पथरी को धीरे-धीरे गलाया जा सकता है या उसका आकार छोटा किया जा सकता है, जैसे पित्त को संतुलित करने वाली चीज़ें जैसे आंवला, भृंगराज, हल्दी, गिलोय और कई घरेलू नुस्खे। कुछ लोगों को सुबह खाली पेट गर्म पानी, नींबू और शहद जैसी चीज़ों का सेवन करने से आराम मिलता है, लेकिन सच तो यह है कि ये नुस्खे हर किसी पर एक जैसा असर नहीं करते।
इस बारे में दिल्ली सरकार में आयुर्वेद के डॉ आरपी पराशर कहते हैं कि पित्त की थैली की पथरी को केवल आयुर्वेदिक दवाओं के माध्यम से निकालना आसान नहीं है. अगर पथरी किडनी में हैं तो दवाएं कुछ हद तक काम कर सकती है, लेकिन पित्त की थैली की पथरी के मामले में आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. अगर पथरी का साइज बढ़ा है तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें|
डॉक्टर्स सर्जरी की सलाह कब देते हैं
अगर पथरी बहुत बड़ी है या बार-बार दर्द और सूजन की शिकायत हो रही है, तो डॉक्टर्स अक्सर सर्जरी की सलाह देते हैं. आजकल तो लेप्रोस्कोपिक सर्जरी होती है, जिसमें न ज़्यादा कट लगता है, न लंबा हॉस्पिटल में रुकना पड़ता है|
पित्त की पथरी कब होती है?
पित्त की पथरी, जिसे गॉलब्लैडर स्टोन भी कहते हैं तब बनती है जब पित्त (bile) में कुछ पदार्थ जैसे कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम की मात्रा का डिसबैलेंस हो जाता है. ये पदार्थ धीरे-धीरे गाढ़े होकर छोटे-छोटे कणों की तरह जमने लगते हैं और बाद में पथरी का रूप ले लेते हैं. अक्सर ये पथरियां लंबे समय तक बिना लक्षण के रहती हैं, लेकिन जब ये पित्त नली को ब्लॉक कर देती हैं, तब पेट के दाहिने ऊपर वाले हिस्से में तेज़ दर्द, उल्टी, गैस, या भारीपन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं|
पित्त की पथरी होने के पीछे के कारक
पित्त की पथरी होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. सबसे आम कारण है शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल बनना या उसकी सफाई ठीक से न होना. जिन लोगों का खानपान बहुत तैलीय और मसालेदार होता है या जो लंबे समय तक खाली पेट रहते हैं, उनमें इसका रिस्क ज़्यादा होता है. मोटापा, डायबिटीज़, फैटी लिवर, जल्दी-जल्दी वजन घटाना, गर्भनिरोधक गोलियों का लंबे समय तक सेवन और महिलाओं में प्रेग्नेंसी के बाद हार्मोनल बदलाव भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाते हैं|
खानपान में क्या करें सुधार
अब बात करते हैं बचाव की. सबसे पहले तो खानपान सुधारना ज़रूरी है ज़्यादा तला-भुना, ऑयली फूड, रेड मीट और प्रोसेस्ड चीज़ों से दूरी बनाएं. फाइबर वाला खाना खाएं जैसे फल, सब्ज़ियां और होल ग्रेन्स. दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी पिएं ताकि शरीर का डिटॉक्स ठीक से हो सके. एक और जरूरी बात ये है कि लंबे समय तक भूखे रहने से भी पित्त गाढ़ा हो सकता है, इसलिए समय पर हल्का-फुल्का खाना खाते रहें|
वजन कंट्रोल में रखना, नियमित वॉक या एक्सरसाइज करना और स्ट्रेस को कंट्रोल में रखना भी पथरी से बचने में मददगार हो सकता है. अगर फैमिली हिस्ट्री है या पहले भी पथरी की शिकायत हो चुकी है तो समय-समय पर अल्ट्रासाउंड करवाना अच्छा रहता है ताकि शुरुआती अवस्था में ही पता चल सके|
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