लाइफ स्टाइल

भूत जोलोकिया से गुंटुर सन्नम तक, ये हैं भारत की सबसे तीखी मिर्चें

Ratna Netam
3 Aug 2026 5:23 PM IST
भूत जोलोकिया से गुंटुर सन्नम तक, ये हैं भारत की सबसे तीखी मिर्चें
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लाइफ स्टाइल : भारत को पूरी दुनिया में अपने मसालों और खास स्वाद के लिए जाना जाता है। भारतीय खाने की पहचान ही यहां इस्तेमाल होने वाले मसालों से होती है। इनमें मिर्च का अपना अलग ही महत्व है। देश के अलग-अलग हिस्सों में मिर्च की कई ऐसी किस्में उगाई जाती हैं, जो स्वाद, रंग और तीखेपन के मामले में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। कुछ मिर्चें खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं, तो कुछ इतनी तीखी होती हैं कि उनका नाम सुनकर ही लोग हैरान रह जाते हैं।

भारत में उगने वाली कुछ मिर्चें अपने तीखेपन की वजह से दुनियाभर में मशहूर हैं। इनमें सबसे खास नाम है भूत जोलोकिया का। यह मिर्च इतनी ज्यादा तीखी मानी जाती है कि भारतीय सेना ने भी इसका इस्तेमाल चिली ग्रेनेड बनाने में किया था। इसका उपयोग भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया गया था। आइए जानते हैं भारत की ऐसी ही पांच सबसे तीखी और खास मिर्चों के बारे में।

भूत जोलोकिया: दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों में शामिल

भूत जोलोकिया भारत की सबसे प्रसिद्ध और बेहद तीखी मिर्चों में से एक है। इसकी खेती मुख्य रूप से असम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में की जाती है। साल 2007 में इस मिर्च को दुनिया की सबसे तीखी मिर्च के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान मिला था।

इस मिर्च का तीखापन इतना ज्यादा होता है कि इसकी थोड़ी सी मात्रा भी पूरे खाने का स्वाद बदल देती है। इसका इस्तेमाल अचार, मसालेदार व्यंजन और कुछ खास उत्पादों में किया जाता है। भूत जोलोकिया की खासियत सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी तीव्रता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने भी इसका इस्तेमाल किया है। भारतीय सेना ने इससे बने चिली ग्रेनेड का प्रयोग भीड़ नियंत्रण के लिए किया था।

कांथारी मिर्च: छोटी आकार में बड़ा तीखापन

केरल और गोवा में पाई जाने वाली कांथारी मिर्च आकार में छोटी होती है, लेकिन इसका तीखापन काफी ज्यादा होता है। यह मिर्च दक्षिण भारत के कई पारंपरिक व्यंजनों का हिस्सा है। इसका उपयोग सब्जियों, चटनी और अचार में किया जाता है।

कांथारी मिर्च की खासियत इसका तेज स्वाद और अलग तरह की खुशबू है। कम मात्रा में इस्तेमाल करने पर भी यह खाने में अच्छा तीखापन ला देती है।

सिरारखोंग हाथेई मिर्च: मणिपुर की खास पहचान

मणिपुर में उगाई जाने वाली सिरारखोंग हाथेई मिर्च अपनी अलग पहचान रखती है। इसका स्वाद और तीखापन इसे दूसरी मिर्चों से अलग बनाता है। अपनी खास गुणवत्ता और क्षेत्रीय पहचान के कारण इसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी जीआई टैग भी प्राप्त है।

यह मिर्च स्थानीय व्यंजनों में काफी लोकप्रिय है और अपनी विशेष सुगंध के लिए जानी जाती है।

गुंटुर सन्नम मिर्च: लाल रंग और तेज स्वाद का मेल

आंध्र प्रदेश की गुंटुर सन्नम मिर्च भारत की प्रमुख व्यावसायिक मिर्च किस्मों में शामिल है। यह अपने गहरे लाल रंग और तेज स्वाद के लिए मशहूर है। इसका इस्तेमाल मसाले, लाल मिर्च पाउडर और अचार बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

गुंटुर सन्नम की मांग भारत के अलावा विदेशों में भी काफी अधिक है। इसकी गुणवत्ता और रंग इसे बाजार में खास स्थान दिलाते हैं।

ब्यादगी मिर्च: रंग और खुशबू के लिए मशहूर

कर्नाटक की ब्यादगी मिर्च बहुत ज्यादा तीखी नहीं होती, लेकिन इसका लाल रंग और शानदार खुशबू इसे बेहद खास बनाते हैं। इसका उपयोग मसालों और लाल मिर्च पाउडर में अधिक किया जाता है।

ब्यादगी मिर्च खाने को आकर्षक रंग देने के साथ-साथ हल्का स्वाद भी प्रदान करती है। यही वजह है कि भारतीय रसोई में इसका इस्तेमाल काफी लोकप्रिय है।

स्कोविल यूनिट से मापा जाता है मिर्च का तीखापन

मिर्च का तीखापन स्कोविल हीट यूनिट यानी SHU के आधार पर मापा जाता है। किसी मिर्च का SHU जितना अधिक होता है, वह उतनी ही ज्यादा तीखी मानी जाती है। सामान्य भारतीय मिर्चों का तीखापन करीब 5 हजार से 50 हजार SHU तक होता है।

वहीं भूत जोलोकिया का तीखापन 10 लाख SHU से भी ज्यादा बताया जाता है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों में शामिल किया जाता है।

हालांकि बहुत ज्यादा तीखी मिर्चों का सेवन सावधानी से करना चाहिए। मिर्च काटने के बाद हाथ अच्छी तरह धोना चाहिए और आंखों को छूने से बचना चाहिए। ज्यादा तीखापन महसूस होने पर पानी की जगह दूध या दही लेना ज्यादा राहत दे सकता है।

भारत की ये मिर्चें सिर्फ स्वाद और तीखेपन के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी पहचान और इतिहास के लिए भी दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। खासकर भूत जोलोकिया ने भारतीय मसालों को एक अलग पहचान दिलाई है।

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