लाइफ स्टाइल

विटामिन D की कमी दूर करने के लिए लोग क्यों खा रहे हैं गोलियां जानें कारण

nidhi
13 Sept 2026 1:38 PM IST
विटामिन D की कमी दूर करने के लिए लोग क्यों खा रहे हैं गोलियां जानें कारण
x
लाइफस्टाइल विटामिन D टैबलेट
भारत को सूरज की रोशनी वाला देश कहा जाता है, फिर भी यहां बड़ी संख्या में लोग विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जहां पहले लोग धूप में समय बिताकर शरीर को विटामिन D देते थे, वहीं अब कई लोग धूप लेने के बजाय विटामिन D की गोलियां और सप्लीमेंट्स का सहारा ले रहे हैं।
बदलती जीवनशैली, घर और ऑफिस के अंदर ज्यादा समय बिताना, प्रदूषण और धूप से बचने की आदत को इसकी बड़ी वजह माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जरूरत लंबे समय तक सप्लीमेंट लेना सही नहीं है और विटामिन D की कमी की पुष्टि के बाद ही डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है।
धूप से मिलने वाला विटामिन D क्यों जरूरी है?
विटामिन D शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं। इसके अलावा यह मांसपेशियों, इम्यून सिस्टम और शरीर के कई जरूरी कार्यों में भूमिका निभाता है।
जब त्वचा सूरज की UV-B किरणों के संपर्क में आती है, तो शरीर प्राकृतिक रूप से विटामिन D बनाता है। यही कारण है कि सुबह की हल्की धूप को स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।
लोग धूप से क्यों बच रहे हैं?
आज की लाइफस्टाइल पहले से काफी बदल गई है। कई लोग सुबह से शाम तक घर, ऑफिस या बंद जगहों पर रहते हैं। काम का समय, ट्रैफिक और शहरी जीवन के कारण लोगों को खुली धूप में समय बिताने का मौका कम मिलता है।
इसके अलावा कई लोग त्वचा को काला होने से बचाने के लिए सनस्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं या धूप से पूरी तरह बचते हैं। इससे शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन D बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
प्रदूषण और शहरीकरण भी बड़ी वजह
बड़े शहरों में बढ़ता प्रदूषण भी धूप की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। प्रदूषित वातावरण में सूरज की किरणों का प्रभाव कम हो सकता है, जिससे शरीर को पर्याप्त विटामिन D बनाने में परेशानी हो सकती है।
इसके अलावा ऊंची इमारतों और बंद घरों वाली जीवनशैली ने भी लोगों का सीधा संपर्क धूप से कम कर दिया है।
विटामिन D की गोलियां क्यों बढ़ीं?
विटामिन D की कमी के लक्षण कई बार सामान्य लग सकते हैं, जैसे थकान, कमजोरी, शरीर में दर्द या हड्डियों में परेशानी। जांच के बाद जब कमी सामने आती है तो डॉक्टर अक्सर सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं।
कई लोग सुविधा के कारण भी गोलियों को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि रोजाना धूप में समय निकालना उनके लिए मुश्किल होता है। खासकर कामकाजी लोगों और बुजुर्गों में सप्लीमेंट का इस्तेमाल बढ़ा है।
क्या सिर्फ गोलियों से पूरी हो सकती है कमी?
विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन D की कमी होने पर सप्लीमेंट मददगार हो सकते हैं, लेकिन संतुलित जीवनशैली भी जरूरी है। उचित समय पर धूप लेना, पौष्टिक आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हैं।
विटामिन D की गोलियां बिना सलाह के ज्यादा मात्रा में लेना नुकसानदायक भी हो सकता है। शरीर में इसकी अधिकता से कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
धूप लेने का सही तरीका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह या दोपहर से पहले की हल्की धूप में कुछ समय बिताना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि धूप लेने का समय और अवधि व्यक्ति की त्वचा, स्थान और मौसम पर निर्भर करती है।
भारत जैसे देश में प्राकृतिक रूप से विटामिन D पाने की संभावना अधिक है, लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण लोगों को अब अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत पड़ रही है।
आज के दौर में विटामिन D की गोलियां कई लोगों के लिए जरूरत बन गई हैं, लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्राकृतिक धूप, सही खानपान और संतुलित दिनचर्या का महत्व हमेशा बना रहेगा।
Next Story